लेखक : बीएस संपादकीय

आज का अखबार, लेख, संपादकीय

बड़े संकट की चेतावनी

जोशीमठ उत्तराखंड के कई तीर्थस्थानों तथा औली जैसे स्कीइंग केंद्र का प्रवेश द्वार है। वहां जमीन धंसने की घटना के लिए जोशीमठ तथा आसपास के इलाकों में अवैज्ञानिक ढंग से किए जा रहे विकास कार्य जिम्मेदार हो सकते हैं। परंतु इसकी बुनियाद उन मानवजनित गतिवि​धियों में ​निहित है जो पारि​स्थितिकी की दृ​ष्टि से तथा भौगोलिक […]

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राजकोषीय स्थिति

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पिछले सप्ताह चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया। यह अत्यधिक महत्त्वपूर्ण आंकड़ा है क्योंकि इसी के आधार पर केंद्रीय बजट का प्रारूप तैयार करने की शुरुआत होती है। आम बजट लोकसभा में अगले महीने के आरंभ में प्रस्तुत किया जाना है। राष्ट्रीय आय […]

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वि​​धि की भावना का ख्याल

रिलायंस कैपिटल की निस्तारण प्रक्रिया को इस सप्ताह राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट की मुंबई शाखा के समक्ष 12 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया गया। पीठ का यह निर्णय न केवल इस मामले से संबं​धित पक्षकारों को प्रभावित करेगा ब​ल्कि यह ऋणशोधन निस्तारण प्रक्रिया पर भी असर डालेगा। इस प्रक्रिया पर […]

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नैनो उर्वरकों के फायदे

नैनो यूरिया की सफलता के बाद, अब दूसरे सबसे अ​धिक खपत वाले उर्वरक डीएपी (डाई अमोनियम फॉस्फेट) के नैनो संस्करण को जैव सुरक्षा और विषाक्तता परीक्षणों में मंजूरी मिल गई है और इसके साथ ही अगले खरीफ सत्र में इसे खेतों में इस्तेमाल करने की औपचारिक स्वीकृति का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। ये […]

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नागरिक समाज और सरकार

नागरिक समाज और भारत सरकार के बीच पिछले कुछ समय से अच्छे ताल्लुकात नहीं हैं लेकिन हाल के दिनों में यह टकराव बढ़ गया है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार नियमन की सख्ती के बाद सन 2017 से 2021 के बीच करीब 6,677 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को विदेशी फंडिंग पाने से संबंधित लाइसेंस […]

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नोटबंदी पर बहस की प्रासंगिकता

सरकार द्वारा नवंबर 2016 में उच्च मूल्य वाले नोट बंद करने के फैसले पर हो रही प्रक्रियागत बहस अब समाप्त हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के एक संवैधानिक पीठ ने सोमवार को 4:1 के बहुमत से प्रक्रिया का समर्थन किया और कहा कि नोटबंदी की पूरी कवयद वैध तथा समानता के परीक्षण को संतुष्ट करने […]

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बाजार रुझान

वर्ष 2023 में भारत के शेष विश्व की तुलना में तेज वृद्धि हासिल करने की उम्मीद है लेकिन यह अच्छी खबर अस्थायी ही है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की खराब हालत की आशंका भी इसके समांतर चल रही है। मुद्रास्फीति बढ़ी हुई है और भारतीय रिजर्व बैंक सहित अधिकांश केंद्रीय बैंक इसे नियंत्रित करने के लिए […]

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खतरनाक कचरे के खतरे

देश में कचरा प्रबंधन उद्योग की अनियमित प्रकृति के कारण हमारा देश दुनिया भर के कचरे का डंपिंग ग्राउंड बन गया है। यह बात हमारे पर्यावरण और जन स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदेह है। इसके लिए काफी हद तक निगरानी और नियंत्रण की कमजोरी, भ्रष्टाचार और सबसे बढ़कर गरीब भारतीय श्रमिकों की मौजूदगी जिम्मेदार है […]

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धीमी वृद्धि वाला वर्ष

वर्ष 2022 को नकदी की आसान उपलब्धता की समा​प्ति वाला वर्ष माना जा सकता है। कम से कम अब तक तो ऐसा ही है। यही वजह है कि आने वाला वर्ष ऊंची ब्याज दरों और धीमी वै​श्विक वृद्धि वाला होगा। भारत में भी वि​​भिन्न चैनलों के जरिये आ​र्थिक नतीजों पर इसका असर पड़ेगा। थोड़ी बहुत […]

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चारे की कमी

सन 1970 के दशक में हुई श्वेत क्रांति के बाद से ही देश में डेरी क्षेत्र में मजबूत और ऊंची वृद्धि देखने को मिलती रही है लेकिन अब यह मुश्किल दौर से गुजरता नजर आ रहा है। इसकी मुश्किलें पशु आहार तथा चारे की कम आपूर्ति एवं ऊंची लागत की वजह से पैदा हुई हैं। […]