हाईवे पर फंसे सेब के ट्रक, मुश्किल में सेब किसान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:11 PM IST

हाइवे पर सेब के ट्रक फंसने से कश्मीर के सेब किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंडियों में ट्रक पहुंचने में हो रही देरी के कारण सेब खराब हो रहा है। जिससे किसानों का एक तो सेब खराब हो रहा है और दूसरा उसकी अच्छी कीमत भी नहीं मिल रही है। उपभोक्ताओं को भी अच्छा और सस्ता सेब नहीं मिल पा रहा है। सेब किसानों का कहना है कि माल खराब होने व अधिक भाड़े के कारण सेब स्थानीय कोल्ड स्टोर संचालकों को कम दाम पर मजबूरी में बेचना पड़ रहा है। जबकि बाहरी राज्यों की मंडियों में ज्यादा दाम मिलते। 
किसानों को हाईवे पर इतने दिनों तक ट्रक रोकने के पीछे कोल्ड स्टोर संचालक और अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका है। सेब उत्पादकों के मुताबिक इस साल देश में सेब की पैदावार 10 फीसदी ज्यादा होने की संभावना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में 24.37 लाख टन सेब पैदा होने का अनुमान है। जिसमें 17.19 लाख टन कश्मीर में और 6.43 लाख टन हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी है। वर्ष 2020-21 में 22.75 लाख टन सेब पैदा हुआ था। 
भारतीय सेब उत्पादक संघ के महासचिव व कश्मीर के सेब किसान अब्दुल अहद रथर कहते हैं कि अनुकूल मौसम से इस साल सेब ज्यादा पैदा हुआ है। जिससे किसानों को लंबे समय बाद अच्छी आमदनी होने की उम्मीद थी। लेकिन बागानों से निकले सेब के ट्रक जम्मू-कश्मीर हाईवे पर 2-3 दिन तक खड़े रहते हैं। कुछ दिन पहले तो 4 से 6 दिनों तक भी ट्रक खड़े रहे। प्रशासन भूस्खलन और निर्माण कार्यों का हवाला देकर ट्रकों को रोक रहा हैं। ऐसा पहले भी होता आया है, लेकिन इतने दिन तक  ट्रक रोकने की जरूरत नहीं पड़ी। ऐसे में कोल्ड स्टोर वाले और अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।  

ट्रक के कई दिनों तक रुकने से काफी सेब खराब हो रहा है। जिससे इसे मजबूरी में स्थानीय मंडी और स्टोर वालों को कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। इस समय किसानों को 16 से 18 किलो की जिस पेटी के 600 से 700 रुपये दाम मिल रहे हैं, जबकि पिछले साल इसी पेटी की 800 से 1,000 रुपये कीमत मिली थी। हल्की गुणवत्ता वाले सेब के दाम तो 300 से 500 रुपये पेटी ही मिल रहे हैं, जबकि अच्छी गुणवत्ता के सेब की पेटी के दाम जरूर 900 रुपये तक मिल रहे हैं। जो पिछले साल से कम हैं। अब्दुल कहते हैं कि जितना इस साल सेब उत्पादन बढ़ा है, उससे ज्यादा तो ट्रकों के जाम में फसने के कारण सेब खराब हो गया है। साथ ही दागी सेब के कम दाम मिल रहे हैं। कुल मिलाकर इस साल ज्यादा पैदावार के बावजूद सेब किसान घाटे में हैं।

दिल्ली की आजादपुर मंडी स्थित कश्मीर ऐपल मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष मीठाराम कृपलानी ने बताया कि दो सप्ताह पहले मंडी में 300 से 350 ट्रक सेब की आवक हो रही थी, जो 3-4 दिन पहले गिरकर 150 ट्रक से नीचे चली गई थी। हालांकि अब यह सुधकर 200  ट्रक हो गई है। इस समय आवक 350-400 ट्रक होनी चाहिए। हाईवे पर जाम में ट्रक फंसने से सेब दागी हो रहा है। जिसके खरीदार भी कम हैं और इसकी किसानों को अच्छी कीमत भी नहीं मिल रही है। अच्छी गुणवत्ता वाला सेब पहले से महंगा बिक रहा है। अगर आवक सुचारू रूप से होती तो आवक के दबाव में यह भी सस्ता होता। इस समय मंडी में सेब 30 से 60 रुपये किलो बिक रहा है। बहुत अच्छी गुणवत्ता के सेब के दाम 80 रुपये किलो तक हैं। हालांकि इसकी मात्रा कम रहती है।

सेब किसान दाम कम मिलने से ही नहीं, बल्कि भाड़ा बढ़ने के कारण भी घाटे में हैं। रथर कहते हैं कि दिल्ली सेब पहुंचाने का भाड़ा 90 से 120 रुपये पेटी से बढ़कर 150 से 160 रूपये, मुंबई का भाड़ा 100-120 रुपये से बढ़कर 170-180 रुपये हो गया है। भाडा बढ़ने के बावजूद किसानों को ज्यादा दाम नहीं मिल पा रहे हैं। आजादपुर मंडी के सेब कारोबारी राकेश कोहली ने बताया कि आजादपुर मंडी में सेब लाने वाले ट्रक का भाड़ा पहले 40 से 50 हजार रुपये था। अब यह बढ़कर 90 हजार से एक लाख रुपये हो गया है क्योंकि जाम के कारण सेब के ट्रक कई दिनों तक सडक पर खड़े रहते हैं। 
 

First Published : October 4, 2022 | 5:50 PM IST