बढ़ेगी खनिजों की उपलब्धता, घटेंगे दाम

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:41 PM IST

घरेलू खनन क्षेत्र में कारोबार सुगमता को मजबूती देने की कवायद के तहत केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना के माध्यम से खनन रियायत नियम, 2016 में संशोधन किया है। इसके माध्यम से खनन उद्योग के नियमन में 4 बड़े बदलाव किए गए हैं। इसमें खदानों को आंशिक रूप से वापस करना, निजी खदान मालिकों द्वारा 50 प्रतिशत तक खनिजों की बिक्री की अनुमति और खदानों का आसानी से हस्तांतरण किए जाने की अनुमति शामिल है।
खनन मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि 2 नवंबर, 2021 से प्रभावी इन संशोधनों को खनन रियायत (चतुर्थ संशोधन) नियम, 2021 के रूप में जाना जाएगा।
किसी भी पट्टे में जहां खनिज का इस्तेमाल निजी इस्तेमाल के लिए होना है, पट्टाधारक इस तरह की खदान से एक वित्त वर्ष के दौरान कुल उत्पादित खनिज का 50 प्रतिशत खुले बाजार में बेच सकेगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उस वित्त वर्ष में उत्पादित खनिज का 50 प्रतिशत इस्तेमाल उस संयंत्र में हो, जिसके उपयोग के लिए खदान आवंटित की गई है।
फेडरेशन आफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) के अतिरिक्त महासचिव बीके भाटिया ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘इस कदम से खुले बाजार में खनिज की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी और उत्पादन व कीमतों को लेकर दबाव दूर होगा।’
सभी प्रमुख खनिज इस संशोधन का हिस्सा हैं। इस तरह से लौह अयस्क, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, जिंक और मैगनीज के खननकर्ताओं के साथ अन्य को इसका लाभ मिलेगा।
भाटिया ने कहा, ‘करीब 90 प्रतिशत लाइमस्टोन खदानें निजी खदान हैं। इस कदम से सीमेंट उद्योग को काफी फायदा होगा।’
टाटा स्टील, हिंडालको इंडस्ट्रीज, हिंदुस्तान जिंक और अल्ट्राटेक सीमेंट सहित कुछ अन्य कंपनियां देश की बड़ी निजी इस्तेमाल की खनिज उत्पादक हैं।  
बहरहाल पट्टाधारक को राज्य सरकार को रॉयल्टी के रूप में अतिरिक्त भुगतान करना होगा। अधिसूचना में कहा गया है कि भुगतान की जाने वाली राशि अलग-अलग खनिजों के मामले में अलग अलग होगी।
खदानों को वापस देने के मामले में पहले खनिकों को पूरी खदान वापस करने की अनुमति थी और आंशिक रूप से वापस करने का विकल्प नहीं था। इससे पट्टाधारक को कभी कभी बहुत असुविधा हो जाती थी और वन संबंधी वजहों व अन्य वजहों के कारण पट्टाधारक आवंटित खदान का विकास नहीं कर पाता था। मौजूदा संशोधन के बाद अब पट्टाधारक आंशिक रूप से भी खदान वापस कर सकेगा।
खदान हस्तांतरित करने के मामले में पहले की प्रक्रिया में यह जरूरी था कि पट्टाधारक राज्य सरकार को कुछ भुगतान करे। बहरहाल अब बगैर किसी शुल्क के खदानों का हस्तांतरण हो सकेगा।
इसके साथ ही रॉयल्टी के देरी से भुगतान पर जुर्माने को भी घटाकर 12 प्रतिशत (रॉयल्टी का) कर दिया गया है, जो पहले 24 प्रतिशत था। फिमी के  भाटिया ने कहा, ‘कुल मिलाकर ये संशोधन स्वागत योग्य हैं, जिससे न केवल ग्राहकों बल्कि उद्योग को भी लाभ होगा।’

First Published : November 8, 2021 | 11:18 PM IST