मांग-आपूर्ति स्थिर रहने की उम्मीदें

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:21 PM IST

भारतीय कपास क्षेत्र आने वाले सत्र में अपेक्षाकृत बेहतर मांग और स्थिर कीमतें रहने की उम्मीद कर रहा है। जो एक कठिन वर्ष के बाद 1 अक्टूबर से शुरू हो गया है। उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, धागा खंड पिछले कुछ महीनों से कम मांग, उच्च कपास की कीमतें और बढ़ते भंडार की समस्या का सामना कर रहा है। खासकर मांग यूक्रेन युद्ध के कारण प्रभावित हुई है। जिसने यूरोप से मांग को प्रभावित किया है, जबकि अमेरिका और अन्य विकसित देशों में आर्थिक मंदी के कारण भी कुछ प्रभाव पड़ा है।
आपूर्ति की तरफ अगर देखें तो पहली अग्रिम अनुमान ने कुछ आशा जगाई है। इसने अगले साल कपास का उत्पादन 3.41 करोड़ गांठ ( 1 गांठ का वजन 170 किलोग्राम) होने का अनुमान लगाया है। जो 2021-22 सत्र के चौथे अग्रिम अनुमान का उत्पादन में 9.58 फीसदी अधिक है। हालांकि, मुख्य कपास उगाने वाले क्षेत्रों में अप्रत्याशित देर से बारिश, कीटों के हमलों में वृद्धि और अन्य फसलों की ओर कुछ बदलाव के कारण हितधारक अनुमान के बारे में संशय में हैं, जिससे हितधारकों को अनुमानों से सावधान किया गया है।
इसके अलावा, वे पहले अनुमान की सटीकता पर भी सशंकित है, क्योंकि इस सत्र में इसमें कई संशोधन हुए हैं। पिछले साल, सरकार ने 21 सितंबर, 2021 को जारी कपास उत्पादन के अपने पहले अग्रिम अनुमान में, 2021-22 सत्र में उत्पादन लगभग 3.62 करोड़ गांठ रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन इस साल 17 अगस्त को जारी किए गए चौथे अनुमान के अनुसार, संख्या लगभग 14 फीसदी  घटकर 3.12 करोड़ गांठ रह गई थी।
संशोधनों का मतलब यह भी था कि कपास निर्यात करने वाले देश भारत को सात से आठ महीनों के भीतर अपने धागे और कपड़ा उद्योग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के लिए मशक्कत करनी पड़ी। सरकार ने अप्रैल में आयात शुल्क में 11 फीसदी की कटौती की ताकि धागा और कपड़ा निर्माता अपने माल की भरपाई कर सकें।

First Published : October 2, 2022 | 10:33 PM IST