23 के अंत तक किसानों की आय दोगुनी होने में शंका!

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:32 PM IST

इस महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने संसद में दिए गए एक जवाब में कहा था कि उसने वित्त वर्ष 2013 के आखिर तक किसानों की आय दोगुनी करने के उपाय किए हैं और अब तक हुई प्रगति ने इस बात का संकेत दिया है कि वह सही राह पर है।
हालांकि आंकड़ों और जताए गए अनुमानों पर बारीकी से नजर डालने पर पता चलता है कि अब तक ऐसा प्रतीत होता है कि शायद देश वास्तविक रूप से यह लक्ष्य प्राप्त न कर पाए।
दलवाई समिति
किसानों की आय दोगुनी करने के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित अशोक दलावई समिति ने अपने 14 खंडों (रिपोर्ट) में कहा था कि किसान की आय, कृषि और गैर-कृषि दोनों स्रोतों से, वर्ष 2022-23 तक (टर्मिनल वर्ष) दोगुनी हो जाएगी। वर्ष 2015-16 से व्यक्ति की आय में प्रति वर्ष 10.4 प्रतिशत तक की वृद्धि होनी है। इसके अलावा यह वृद्धि वास्तविक या मुद्रास्फीति-समायोजित के रूप में होती, न कि नॉमिनल रूप में।
समिति ने कहा था कि किसानों की वास्तविक आय को दोगुना किया जाना है, न कि नॉमिनल आय को। इसने अनुमान लगाया था कि वर्ष 2015-16 में किसी कृषक परिवार की औसत वार्षिक आय 96,703 होगी। अनुमान लगाया गया था कि यह वर्ष 2022-23 तक यानी चालू वित्त वर्ष के अंत तक यह बढ़कर 1,72,694 हो जाएगी। मौजूदा कीमतों पर यह वृद्धि बढ़कर 15.9 प्रतिशत दर होती।
हालांकि राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) द्वारा पिछले साल जारी किए गए नवीनतम स्थितिजन्य मूल्यांकन सर्वेक्षण से पता चलता है कि सभी स्रोतों से किसी कृषक परिवार की वास्तविक आय वर्ष 2012-13 और 2018-19 के बीच लगभग 21 प्रतिशत बढ़ी है। इसका मतलब यह है कि वास्तविक रूप से केवल 3.5 प्रतिशत या इसके आसपास की औसत वार्षिक वृद्धि दर रही।
नॉमिनल रूप में वर्ष 2012-13 और वर्ष 2018-19 के बीच आय में 60 प्रतिशत तक या 10 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि हुई।
वर्ष 2015-16 और 2022-23 के बीच, जब वृद्धि दर लक्ष्य की तुलना में आधे से भी कम रही है, वास्तविक रूप में आय में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद करना अवास्तविक लगता होता है।
क्या गलत हुआ?
इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च (आईजीआईडीआर) के निदेशक एस महेंद्र देव ने कहा कि शुरुआत वाला लक्ष्य अवास्तविक था।
उन्होंने कहा कि एनएसएसओ के स्थितिजन्य मूल्यांकन सर्वेक्षण से पता चलता है कि 10.4 प्रतिशत वार्षिक वास्तविक आय वृद्धि हासिल करने का लक्ष्य किस तरह काफी असंभव था, जब वास्तविक आय में औसत वार्षिक वृद्धि इससे पिछली अवधि के दौरान मात्र 3.5 प्रतिशत थी।
देव ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि अगर आय में वृद्धि की नॉमिनल दर पर विचार किया जाता है, तो कुछ लक्ष्य प्राप्त (संभावनात्म रूप से) मिल सकता था, लेकिन यहां प्रमुख पैमाइश मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक आय है।
उन्होंने कहा कि नीतियों को स्पष्ट नहीं किया गया था और केंद्र द्वारा किसानों को चावल और गेहूं की ओर से हटवाकर और अधिक आकर्षक तथा अधिक मूल्य वाली फसलों की ओर ले जाने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने की आवश्यकता थी।

First Published : April 26, 2022 | 1:16 AM IST