खराब मौसम, कीड़ों का प्रकोप और आंधी के चलते इस बार फलों का राजा दशहरी आम लोगों की जेब कुछ ज्यादा ढीली कराएगा। कोरोना संकट से उबरने के बाद इस बार अच्छे कारोबार की आस लगाए बैठे आम के कारोबारियों की उम्मीदें कमजोर फसल के चलते टूट गई है। उत्तर प्रदेश के फल पट्टी क्षेत्र काकोरी-मलिहाबाद में इस बार दशहरी की फसल बीते वर्षों के मुकाबले कमजोर है। कम पैदावार के चलते दशहरी के बागों की उठान भी ऊंचे दामों पर हुई है और तैयार आम भी ज्यादा कीमत पर बिकने का अंदेशा जताया जा रहा है।
सर्दियों की जल्द विदाई और बौर लगने के समय तापमान बढऩे से इस बार दशहरी ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले लंगड़ा, चौसा और सफेदा की फसल भी प्रभावित हुई है। कीटों से प्रकोप से भी फसल को नुकसान हुआ है। हालांकि हाल के दिनों में आई आंधी और उसके बाद बारिश ने कुछ हद तक कीटों की समस्या से निपटने में मदद की है मगर काफी तादाद में फसल खराब हो चुकी है। कारोबारियों के मुताबिक इस बार दशहरी के दाम थोक मंडी में 50 से 60 रुपये किलो खुलने की उम्मीद है। खुले बाजार में कीमत और भी ज्यादा हो सकती है।
प्रदेश के आम कारोबारियों का कहना है कि लगातार कई वर्षों से अच्छी फसल के बाद इस बार बौर के समय से ही मौसम बिगड़ गया था। नतीजतन आम के पेड़ों में बौर भी पहले के मुकाबले कम ही आए। मलिहाबाद के मशहूर बागवान शबीहुल हसन बताते हैं कि इस बार फल पट्टी क्षेत्र में दशहरी के आधे पेड़ों में ही फल लगे हैं। दशहरी के साथ ही इस इलाके के मशहूर चौसा और सफेदा की फसल भी प्रभावित हुई है।
हसन का कहना है कि बीते दो साल से कोरोना के चलते आम का निर्यात प्रभावित रहा था। उनका कहना है कि महामारी के चलते बीते साल तो आम के बाग ही कम बिक पाए थे और अच्छी फसल के बावजूद दाम कम मिले थे।
इस बार कोराना संकट नहीं है तो फसल ही कमजोर हुई है। सामान्य मौसम में 75 फीसदी बाग अग्रिम में बिक जाते हैं। फल पट्टी क्षेत्र में बड़े कारोबारी बागवानों से सीधे पूरे बाग की अग्रिम में खरीद कर लेते हैं। बाद में फल तोड़ाई और उन्हें बेचने का काम करते हैं।
सामान्य वर्षों में उत्तर प्रदेश से आम का सालना कारोबार 2,400 से 2,500 करोड़ रुपये का रहता था जो बीते दो साल घटकर 800 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये रह गया था। इस बार भी कारोबार के समान्य स्तर पर भी पहुंचने की उम्मीद नहीं है। राजधानी लखनऊ से सटे फल पट्टी क्षेत्र काकोरी, माल और मलिहाबाद में 27,000 हेक्टेयर में आम की पैदावार होती है।