सफेद सरसों का रिकॉर्ड उत्पादन किसानों ने किया भंडारण

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 8:11 PM IST

देश में सफेद सरसों की रिकॉर्ड पैदावार हुई है लेकिन आगामी महीनों में इसकी पेराई धीमी पड़ सकती है। इसकी वजह है कि बहुत सारे किसान आगे भाव में और अधिक वृद्घि होने की उम्मीद में तिलहन प्रोसेसरों को उत्पाद बेचने से परहेज कर रहे हैं। किसानों द्वारा बिक्री की  रफ्तार धीमी पडऩे से देश में सफेद सरसों की रिकॉर्ड पैदावार के बावजूद विदेशों से पाम तेल और सोयाबीन तेल का आयात करना पड़ सकता है। भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक है।
राजस्थान में निवाई के किसान रामरस चौधरी ने कहा, ‘पिछले दो वर्ष से मैंने देखा है कि कटाई के तुरंत बाद जब मैंने व्यापारियों को फसल बेच दी तो उसके बाद भाव बढ़ गए। इस साल मैंने फसल को कुछ महीने अपने पास रोकने का निर्णय लिया है।’ मार्च 2021 में जब किसानों ने सफेद सरसों की बिक्री शुरू की तब दाम प्रति टन 6,000 रुपये से कम मिल रहे थे लेकिन सितंबर में भाव बढ़कर 8,813 रुपये प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। दाम में इस इजाफे से प्रेरित होकर किसानों ने इसका रकबा बढ़ाने का निर्णय लिया। सफेद सरसों की बुआई नवंबर महीने में की जाती है। जयपुर के एक व्यापारी अनिल चतर कहते हैं कि रकबा बढऩे और जमीन में पर्याप्त नमी होने के कारण देश में सफेद सरसों की पैदावार 1.1 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 28 फीसदी अधिक है।
चतर ने कहा, ‘पैदावार पिछले वर्ष से काफी अधिक है लेकिन पेराई तब तक जोर नहीं पकड़ेगी जब तक कि किसान इसकी बिक्री शुरू नहीं करते हैं।’ 

First Published : April 5, 2022 | 11:51 PM IST