अंतर्राष्ट्रीय बाजार में खाने के तेल के दामों में गिरावट की वजह से अगस्त में पाम तेल का आयात 11 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अगस्त में जुलाई के मुकाबले 94 फीसदी आयात अधिक हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पाम तेल के दाम गिरने के साथ त्योहारी सीजन में घरेलू बाजार में मांग बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए आयातकों ने ज्यादा मात्रा में तेल आयात किया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पाम तेल की कीमतें कम होने के साथ सरकारी सख्ती के चलते घरेलू बाजार में भी खाद्य तेल सस्ते होने की उम्मीद की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम तेल के दामों में 40 फीसदी तक की गिरावट हुई है। पाम तेल की कीमत अपने ऊंच स्तर 1800 से 1900 डॉलर प्रति मिट्रिक टन से घटकर 1,000 से 1100 डॉलर मिट्रिक टन पर आ चुकी हैं। कीमतें गिरने की वजह से दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक भारत ने अगस्त में 10 लाख टन से ज्यादा पाम तेल (10.3 लाख टन) का आयात किया । पिछले महीने पाम तेल आयात 5.3 लाख टन हुआ था।
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर के मुताबिक पाम तेल अन्य तेलों की तुलना में बहुत किफायती हो गया है। पिछले महीने कीमतों में अंतर तेजी से बढ़ा । कच्चे पाम तेल की पेशकश लागत, बीमा और माल ढुलाई (सीआईएफ) सहित 1,011 डॉलर प्रति टन पर की जा रही है, जबकि कच्चे सोया तेल के लिए 1,443 डॉलर की तुलना में यह काफी कम है। अक्टूबर के अंत तक शुल्क मुक्त निर्यात की अनुमति देने के इंडोनेशिया के कदम ने बाजार में आपूर्ति में वृद्धि की और कीमतों में कमी की, जबकि अप्रैल-मई में, इंडोनेशिया निर्यात को प्रतिबंधित कर रहा था। अब यह हो गया है स्टॉक को घटाने के लिए बाजार में आपूर्ति बढाई जा रही है।
वैश्विक बाजार में सोया तेल के मुकाबले पाम तेल 350-400 डॉलर प्रति टन सस्ता हुआ। अगस्त में सोया तेल आयात 54 फीसदी घटकर 2.40 लाख टन हुआ। कैट के महामंत्री तरुण जैन ने कहा भारत सरकार द्वारा आयात शुल्क में कमी के आदेश की सीमा बढ़ाने से आयात आगे भी बड़े पैमाने पर होगी जिससे नई फसल लेकर बाजारों में आने वाले किसानों को फसल के दाम उनकी सोच से काफी कम मिलेंगे और अगली फसल के लिए फिर किसान दो बार सोचेगा इसलिए सरकार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेलों के दाम ज्यादा गिरते हैं तो आयात शुल्क के बारे में उचित निर्णय लेना होगा अन्यथा सरकार की मंशा भारत को तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की सोच धरी की धरी रह जाएगी ।
घरेलू बाजार में खाद्य तेलों के दाम कम हो इसके लिए केन्द्र सरकार ने खाने के तेल के आयात पर कस्टम ड्यूटी में छूट को 6 महीने के लिए बढ़ाकर मार्च 2023 तक कर दी। माना जा रहा है कि इससे आपूर्ति बढ़ेगा और घरेलू बाजार में दाम नियंत्रण में रहेगे। सरकार खाद्य तेल कंपनियों से दाम कम करने को भी कह रही है। जिसकी वजह से पिछले दो महीनो में 20 से 30 रुपये प्रति लीटर तक खाने के तेलों दाम कम हुए हैं। लेकिन उपभोक्ताओं को अभी भी पूरा फायदा नहीं मिल रहा है जिस पर सरकार की नजर है। कारोबारियों की मानी जाए तो जल्द ही खाद्य तेलों के दाम 10-15 रुपये और कम होगे।