जीएसटी के दायरे में आएगा पेट्रोल-डीजल!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 7:30 AM IST

राज्य सरकारों को पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर आपत्ति नहीं हैं लेकिन इसके लिए वे केंद्र से समुचित मुआवजा तंत्र और ठोस प्रस्ताव चाहते हैं।

पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है लेकिन केंद्र संभवत: इस पर इच्छुक नहीं होगा क्योंकि वह पेट्रोल और डीजल पर करों से काफी ज्यादा कमाई कर रहा है और इसे राज्यों के साथ साझा भी नहीं करना होता है।

उन्होंने कहा, ‘जीएसटी की अधिकतम दर 28 फीसदी है और इस दायरे में पेट्रोल-डीजल को लाया जाता है तो केंद्र को केवल 14 फीसदी कर मिलेगा। इसलिए निश्चित तौर पर केंद्र सरकार ईंधन को जीएसटी के दायरे में नहीं लाना चाहेगी।’

उनका तर्क था कि पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर का 70 फीसदी हिस्सा उपकर का है, जिसे राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘पेट्रोल के मामले में केंद्र राज्यों की तुलना में दोगुना और डीजल पर तीन गुना कमाई कर रहा है।’ मित्रा ने कहा कि जीएसटी के तहत राजस्व को सीजीएसटी और एसजीएसटी के अंतर्गत केंद्र तथा राज्यों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाता है।

केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे तथा मुआवजा तंत्र पर परिषद की बैठक में चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘इसका फॉर्मूला एक ही है। ईंधन को जीएसटी में लाने पर राज्य को होने वाले कर नुकसान की भरपाई की जाए। अगर ऐसा होता है तो हम तैयार हैं। परिषद की बैठक में इस पर चर्चा होने दें। लेकिन मुआवजे पर राज्यों के साथ मिलकर व्यवस्था बनानी होगी।

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव, जो जीएसटी परिषद की बैठकों में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने कहा कि ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाने पर राज्यों को नुकसान नहीं होना चाहिए। कर में बराबर हिस्सा मिलने के साथ ही राज्यों को सीजीएसटी में भी अतिरिक्त 41 फीसदी मिले।

देव ने कहा, ‘राज्यों को अभी जो राजस्व मिल रहा है, उसमें कमी नहीं आनी चाहिए। अगर छत्तीसगढ़ को ईंधन पर कर से अभी 3,000 करोड़ रुपये मिल रहे हैं तो जीएसटी के तहत यह कम नहीं होना चाहिए और आने वाले वर्षों मेें यह बढऩा चाहिए। इसलिए मुआवजा नीति पर काम करने की जरूरत है।’

चालू वित्त वर्ष में जीएसटी मुआवजे पर लंबे समय तक चर्चा की गई लेकिन जब केंद्र राज्यों की ओर से उधारी लेने पर सहमत हुआ तब मसला सुलझा। 1 अप्रैल, 2017 से लागू हुए जीएसटी में करीब 17 केंद्रीय और राज्य करों को मिलाया गया था। हालांकि अल्कोहल, बिजली, रियल एस्टेट क्षेत्र का कुछ घटक को इसके दायरे से बाहर रखा गया था। पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल किया गया था लेकिन पांच पर जीएसटी नहीं लगाई गई थी, जिनमें कच्चा तेल, प्रकृतिक गैस, विमानन ईंधन, डीजल और पेट्रोल शामिल है। इसका मतलब यह हुआ कि जीएसटी परिषद जब भी चाहेगी इसे जीएसटी के दायरे में ला सकती है और इसके लिए संविधान में संशोधन भी नहीं करना होगा।

पेट्रोल और डीजल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कहा था केंद्र और खुदरा कीमतों को वाजिब स्तर पर लाने की व्यवस्था के लिए राज्य सरकारें साथ मिलकर काम करेंगी।

First Published : March 4, 2021 | 10:55 PM IST