निजी कंपनी को अफीम प्रसंस्करण की इजाजत मिली

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:36 PM IST

निजी कंपनियों के लिए अफीम प्रसंस्करण का दरवाजा खोलते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार बजाज हेल्थकेयर को इसकी इजाजत दे दी है ताकि वह इससे अल्कलॉयड निकाल सके। अल्कलॉयड का इस्तेमाल आम दर्द निवारक दवा, खांसी के सीरप और कैंसर की दवाओं में होता है। अभी तक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दो सरकारी कारखानों में हर साल करीब 800 टन अफीम से अल्कलॉयड निकाला जा रहा है।
हालांकि ठाणे की कंपनी बजाज हेल्थकेयर को शुरुआत में हर साल 500 टन अफीम प्रसंस्करण का ठेका मिला है मगर केंद्र अगले 5 साल में इसे बढ़ाकर 800 टन करना चाहता है। इससे लगता है कि वह अफीम प्रसंस्करण के काम से धीरे-धीरे निकलना चाहता है।
बजाज हेल्थकेयर ने कहा, ‘हमें अफीम से अल्कालॉयड और एपीआई सरकार को देने के दो ठेके मिले हैं। ये ठेके लंबे समय के लिए हैं और इसी निविदा में हमें लगातार ठेके मिलने तथा अगले 5 साल में करीब 6,000 टन पोस्ता दाना तथा अफीम प्रसंस्करण की उम्मीद है।’
कंपनी के संयुक्त प्रबंध निदेशक अनिल जैन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि सरकार अल्कलॉयड का प्रसंस्करण जारी रख सकती है और नए तथा अधिक जटिल पदार्थ बना सकती है। उन्होंने कहा,  ‘पोस्ता दाने से अफीम निकालने का काम हमें ठेके पर दिया गया है। हम इससे अल्कालॉयड निकालकर सरकार को दे देंगे। वह अल्कलॉयड दवा कंपनियों को दे सकती है, जो इसका इस्तेमाल करती हैं।’
बजाज हेल्थकेयर ने 34 एकड़ में फैले अपने सावली संयंत्र के एक ब्लॉक में बदलाव किया है और वहीं से 100 टन सालाना अफीम का प्रसंस्करण शुरू किया जाएगा। जैन ने बताया कि वहां 250 टन सालाना अफीम प्रसंस्करण किया जा सकता है और इसे साल-दर-साल बढ़ाने की कंपनी की योजना है।
सरकार ने जब अनुरोध पत्र मांगे तो 20-25 कंपनियां पहुंची थीं। जैन बताते हैं कि इस कारोबार में भरपूर मार्जिन है। एपीआई बनाने वालों को 18 से 35 फीसदी एबिटा मार्जिन मिल सकता है। अफीम के प्रसंस्करण में मार्जिन इससे भी ज्यादा है। जैन कहते कि अफीम सरकार देती है इसलिए कच्चे माल पर कुछ खर्च ही नहीं करना पड़ता।
औद्योगिक सूत्रों का कहना है कि भारत में अफीम प्रसंस्करण का काम निजी कंपनियों को देने की कोशिश इसीलिए की जा रही है क्योंकि सरकारी कारखाने बढ़ती मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने 2011-12 में भी निजी कंपनियों खासकर फार्मा कंपनियों को अफीम की खेती में लगाने की कोशिश की थी। लेकिन उन्होंने दिलचस्पी
नहीं दिखाई।
भारत अफीम की कानूनी खेती करने वाले चुनिंदा देशों में शुमार है और अफीम का प्रसंस्कण करने वाला इकलौता देश है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग की वेबसाइट कहती है, ‘केंद्रीय मादक पदार्थ ब्यूरो, ग्वालियर किसानों को अफीम की खेती का लाइसेंस देता है, फसल पर नजर रखता है और नियंत्रण भी करता है। लाइसेंस वाले किसानों से उपज भी वही खरीदता है।’ ब्यूरो द्वारा इकट्ठी की गई अफीम गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) और नीमच (मध्य प्रदेश) के कारखानों में सरकार के सुपुर्द कर दी जाती है। अफीम का कुछ हिस्सा सुखाकर निर्यात कर दिया जाता है और कुछ हिस्सा सरकारी कारखानों में अल्कलॉयड निकालने के काम आ जाता है। ये अल्कलॉयड दवा बनाने के काम आ जाते हैं, जहां इनसे मॉर्फीन, कोडीन, थेबैन और अन्य अल्कलॉयड निकालकर दवा कंपनियों को बेच दिए जाते हैं।
जैन बताते हैं कि 800 टन अफीम से करीब 60 से 90 टन अल्कलॉयड और एपीआई निकाले जा सकते हैं। मुख्य कारखाना नियंत्रक मांग के मुकाबले कम आपूर्ति देखते हुए कोडीन का आयात भी करते हैं।
बजाज हेल्थकेयर मुख्यत: एपीआई कंपनी है और उसे 680 करोड़ रुपये राजस्व का 90 फीसदी हिस्सा एपीआई और इंटरमीडिएट से ही मिलता है। बाकी राजस्व तैयार खुराक से प्राप्त होता है। जैन कहते हैं कि वह अब भारत से बाहर अल्कलॉयड के क्षेत्र में अवसर भी तलाशेंगे।
सन फार्मा जैसी कुछ दवा कंपनियां भी अफीम का प्रसंस्करण करती हैं मगर वे यह काम ऑस्ट्रेलिया और हंगरी जैसे देशों में करती हैं। कंपनी तस्मानिया में पोस्ता उगाती है। 2021 में कंपनी ने तस्मानिया में पोस्ते की खेती कम रकबे में की थी क्योंकि कोरोना के कारण दुनिया भर में दर्द निवारक दवाओं का सेवन घट गया था।

First Published : July 13, 2022 | 11:09 PM IST