खदानों, बंदरगाहों तक पहुंच बढ़ाकर राजस्व बढ़ाएगा रेलवे

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 8:42 PM IST

भारतीय रेलवे देश भर में ऐसे कोयला, खनिज खदानों और बंदरगाहों का मानचित्रण करने की योजना बना रहा है जहां तक संपर्क बिल्कुल ही नहीं है या फिर अपर्याप्त है।
रेलवे इन्हें अपने अग्रणी मिशन हंग्री फॉर कार्गो का हिस्सा बनाने जा रहा है। रेलवे इन इलाकों को यहां से नई लाइनें बिछाकर और मौजूदा नेटवर्क को सुदृढ़ कर देश के मुख्य रेल ग्रिड से जोड़ेगा।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम इस परियोजना के लिए 48 कोयला और खनिज खदानों तथा 29 बंदरगाहों का मानचित्रण और सर्वेक्षण कर रहे हैं। हमने लगभग 10 करोड़ टन खनिजों को चिह्नित किया है।’
एक ओर जहां परियोजना सर्वेक्षण के चरण में है वहीं मंत्रालय की नजर 52 जिलों में फैले इन खदानों और बंदरगाहों को रेल नेटवर्क से जोड़कर 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व हासिल करने पर है।      
रेल मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय ने इन ठिकानों का सर्वेक्षण मुख्य तौर पर तीन खनिजों – कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट के लिए किया है। उन्होंने कहा कि परियोजना रेलवे के हंग्री फॉर कार्गो मिशन के तहत चलाई जा रही है।
हंग्री फॉर कार्गो मंत्रालय की एक आंतरिक परियोजना है जिसके तहत रेलवे का मकसद माल ढुलाई से राजस्व में इजाफा करना है। एक अधिकारी ने कहा कि इसे नई जिंसों को शामिल, मौजूदा और नए क्षेत्रों तथा इलाकों में कार्गो के अवसर की पहचान कर अंजाम दिया जा रहा है।
निकट भविष्य में रेलवे का मकसद 2024 तक 2,024 परियोजना के तहत 2023-24 तक 200 करोड़ टन से अधिक कार्गो का लदान करना है।
2021-22 में उसने फरवरी तक 127.8 करोड़ टन माल का लदान किया है और वित्त वर्ष समाप्त होने तक 140 करोड़ टन माल के लदान की तरफ बढ़ रहा है।
क्षेत्र विश्लेषकों का मानना है कि अन्य कारणों सहित प्रमुख क्षेत्रों में अंतिम स्थान तक संपर्क की कमी के कारण कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी कम रही है।
2020 में देश भर में कुल माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी 27 फीसदी थी। राष्ट्रीय रेल योजना के तहत केंद्र सरकार 2050 तक इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 45 फीसदी करना चाहती है। मंत्रालय अपने माल ढुलाई बास्केट में विविधता लाने पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल इसमें मोटे तौर पर कच्ची सामग्री का दबदबा है।    
रेलवे के कुल माल ढुलाई राजस्व में कोयले की हिस्सेदारी 47 फीसदी अनुमानित है वहीं माल ढुलाई बास्केट में लौह अयस्क का योगदान 9 फीसदी आंका गया है।
यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब कोयला मंत्रालय ने भी रेल लाइनों और बढ़े हुए माल ढुलाई नेटवर्क की मांग में वृद्घि का अनुमान लगाया है। इसकी वजह है कि मंत्रालय निजी क्षेत्र और सरकारी क्षेत्र की कंपनी कोल इंडिया को अधिक संख्या में खदानों की पेशकश करता है। मंत्रालय का लक्ष्य 1 अरब टन कोयला उत्पाद तक पहुंचना है।
कोयला मंत्रालय ने कोयला खाली करने के लिए पांच वर्षीय अपनी दृष्टि योजना में पहले ही 12 नई रेलवे लाइन परियोजनाओं को चिह्नित किया है। बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा देखे गए दस्तावेज के मुताबिक परियोजनाओं की समयसीमा मार्च 2024 है।
निजी क्षेत्र को अपने इस्तेमाल के लिए कोयला खदानें आवंटित करने के बाद कोयला मंत्रालय ने विगत दो वर्षों में वाणिज्यिक उद्देश्यों यानी खनन  और खुले बाजार में बिक्री के लिए भी खदानों के आवंटन को तेज कर दिया है।
इन सभी खदानों के लिए संपर्क की आवश्यकता पड़ेगी। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि रेलवे की नई लाइनें कोयला आपूर्ति नेटवर्क पर दबाव को कम करने में मददगार होंगी।   
 

First Published : March 16, 2022 | 11:32 PM IST