कमजोर रुपये व वैश्विक तेजी से चीनी निर्यात बढ़ा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 8:49 PM IST

भारत की चीनी मिलों ने हाल के दिनों में 5,50,000 टन चीनी निर्यात के सौदे किए हैं।  रॉयटर्स से 4 डीलरों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दाम अधिक होने और रुपये के कमजोर होने की वजह से चीनी निर्यात आकर्षक हो गया है। विश्व के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक की ओर से ज्यादा निर्यात किए जाने से वैश्विक दाम में तेजी पर काबू पाया जा सकता है। सबसे बड़े निर्यातक ब्राजील में उत्पादन कम होने और कच्चे तेल के दाम में तेजी की वजह से इसकी कीमतें बढ़ी हैं।
निर्यात से भारत को चीनी का भंडार घटाने और स्थानीय कीमतों को समर्थन देने में मदद मिलेगी। गन्ना के किसानों को सरकार द्वारा तय मूल्य के भुगतान की वजह से यह अहम है। एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के प्रबंध निदेशक राहिल शेख ने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र व कर्नाटक की मिलें बाजार में सक्रिय रही हैं। स्थानीय कीमत की तुलना में उन्हें बेहतर मुनाफा हो रहा है।’
डीलरों के अनुमान के मुताबिक भारत की मिलों ने 2021-22 में अब तक 64 लाख टन चीनी निर्यात के लिए समझौता किया है। इसमें से 50 लाख टन पहले ही भेजा जा चुका है। एक वैश्विक कारोबार फर्म से जुड़े मुंबई के कारोबारी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत के कारोबारियों ने मुख्य रूप से इंडोनेशिया और बांग्लादेश जैसे एशिया के खरीदारों को कच्ची चीनी बेची है, जो मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान के लिए चीनी जुटा रहे हैं।
इसके पहले के चीनी सत्र में भारत ने रिकॉर्ड 72 लाख टन चीनी का निर्यात किया था। विदेश में बिक्री पर सरकार द्वारा दी गई सब्सिडी का लाभ निर्यातकों ने उठाया था। वैश्विक ट्रेडिंग फर्म से जुड़े नई दिल्ली के एक डीलर ने कहा कि इस साल बगैर सरकारी प्रोत्साहन के मिलें 75 से 80 लाख टन चीनी का निर्यात कर सकती हैं। डीलर ने कहा, ‘रुपया और वैश्विक दाम समर्थन कर रहा है। अगर महंगाई बढऩे के डर से सरकार निर्यात पर कोई सीमा नहीं लगाती है तो निर्यात बढ़कर 80 लाख टन हो सकता है।’

First Published : March 10, 2022 | 11:15 PM IST