केंद्र सरकार ने देश में कच्चा तेल उत्पादन करने वालों पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) और पेट्रोल, डीजल एवं विमान ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क लगा दिया है तथा सोने पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है। आज हुए इस फैसले का मकसद रुपये पर दबाव कम करना, चालू खाते का बढ़ता घाटा काबू करना और पेट्रालियम उत्पादों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाना है।
सोने का आयात कम करने के लिए सरकार ने इस पर सीमा शुल्क 10.75 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। मई में देश में 107 टन सोने का आयात किया गया था, जिससे चालू खाते का घाटा बढ़ रहा है।
घरेलू उत्पादक स्थानीय तेलशोधकों को अंतरराष्ट्रीय मूल्य के हिसाब से कच्चा तेल बेचते हैं और ऊंचे दाम के कारण इस समय उन्हें अप्रत्याशित लाभ हो रहा है। दूसरी ओर देसी बाजार में पिछले एक महीने से ईंधन की कमी चल रही है और निजी कंपनियों के कई पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं। इसीलिए पट्रोल के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया है।
पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से निजी तेल कंपनियों ने अप्रत्याशित लाभ कमाया, जबकि मई में पेट्रोल पर 8 रुपये और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क घटाने के फैसले से इस वित्त वर्ष में सरकारी खजाने को 85,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चपत लग रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए सरकार ने घरेलू ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने और अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने के लिए दोहरा कदम उठाया है। उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि भारत रिफाइनिंग का केंद्र बने। ईंधन निर्यातक इस दिशा में काम कर रहे हैं। हमें खुशी है कि कंपनियां अप्रत्याशित लाभ कमा रही हैं। इसमें से कुछ हमें अपने नागरिकों के लिए चाहिए।’
कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन अतिरिक्त उपकर से ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, वेदांत की केयर्न ऑयल ऐंड गैस और रिलायंस इंडस्ट्रीज पर काफी असर पड़ेगा। केंद्र सरकार को इससे सालाना 67,400 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। हालांकि गत वित्त वर्ष में 20 लाख बैरल से कम कच्चे तेल का उत्पादन करने वालों पर उपकर नहीं लगाया गया है। ओएनजीसी के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आर एस शर्मा ने कहा, ‘यह बेतुकी बात है। अप्रत्याशित या विंडफॉल कर किसी वस्तु के भाव के हिसाब से वसूला जाता है (जिसे एड वेलोरम कहते हैं) और मुनाफे से जोड़ा जाता है। इसलिए यह विंडफॉल कर नहीं है बल्कि कर ही है।’ शुल्क बढ़ाए जाने की खबर से ओएनजीसी का शेयर 13.3 फीसदी और ऑयल इंडिया का शेयर 14.8 फीसदी गिरावट पर बंद हुआ। कुल 2.97 करोड़ टन घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी 72 फीसदी है। 2022-23 में इन कंपनियों के कच्चे तेल का औसत मूल्य 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल रहा है। हालांकि सरकार ने कहा कि उपकर से प्रतिकूल असर नहीं पड़गा और आयातित कच्चे तेल पर यह उपकर लागू नहीं होगा। एटीएफ पर प्रति लीटर 6 रुपये विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क बढ़ाने के पीछे भी यही तर्क दिया गया है। 2021-22 में देश से केवल 50 लाख टन एटीएफ का निर्यात किया गया था। एमके में लीड अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि आयात और निर्यात पर शुल्क के जरिये प्रत्यक्ष अंकुश का निर्णय चालू खाते के घाटे और स्थानीय मुद्रा की गिरावट को देखते हुए लिया गया है।