चालू खरीफ सीजन की बोआई अंतिम दौर में पहुंचने के बावजूद फसलों का कुल रकबा पिछले साल की अपेक्षा थोड़ा कम है। खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान के रकबा में करीब 6 फीसदी की कमी दर्ज की गई है तो कपास के रकबे में लगभग सात फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। देश में फसलों का कुल रकबा पिछले साल की अपेक्षा 1.6 फीसदी कम है। फसलों का रकबा कम होने की वजह से लगातार छह साल तक नए रिकॉर्ड कायम करने के बाद इस साल 2022 में खरीफ अनाज के उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
कृषि मंत्रालय एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक दो सितंबर तक देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा 1.6 फीसदी घटकर 1045.14 लाख हेक्टेयर रह गया जबकि पिछले साल इस समय तक देश में 1061.92 लाख हेक्टेयर में फसलों की बोआई हुई थी। खरीफ फसलों का सामान्य क्षेत्रफल 1084.97 लाख हेक्टेयर है यानी अभी भी देश में खरीफ फसलों की बोआई 16.78 लाख हेक्टेयर कम है। कुछ राज्यों में बारिश कम होने के कारण चालू खरीफ सत्र में अबतक धान का रकबा 5.62 प्रतिशत घटकर 383.99 लाख हेक्टेयर रह गया है। एक साल पहले की समान अवधि में धान की बोआई 406.89 लाख हेक्टेयर में की गई थी। धान मुख्य खरीफ फसल है और इसकी बोआई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ शुरू होती है और अक्टूबर से कटाई की जाती है।
चालू खरीफ सत्र में अब तक झारखंड में धान की बोआई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 9.80 लाख हेक्टेयर कम है जबकि मध्य प्रदेश में 6.32 लाख हेक्टेयर, पश्चिम बंगाल में 4.45 लाख हेक्टेयर, छत्तीसगढ़ में 3.91 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 2.61 लाख हेक्टेयर और बिहार में धान बुवाई का रकबा पिछले साल से 2.18 लाख हेक्टेयर कम है। वहीं ओडिशा (84,000 हेक्टेयर), आंध्र प्रदेश (31,000 हेक्टेयर), असम (29,000 हेक्टेयर), मेघालय (21,000 हेक्टेयर), पंजाब (12,000 हेक्टेयर), जम्मू-कश्मीर (5,000 हेक्टेयर), मिजोरम (3,000 हेक्टेयर), सिक्किम (2,000 हेक्टेयर) और त्रिपुरा (1,000 हेक्टेयर) में धान बुवाई के रकबे में खास गिरावट नहीं आई है।
धान की फसल के विपरीत कपास की बोआई में जोरदार बढ़ोतरी हुई है। चालू सीजन में अभी तक देश भर में कपास का रकबा 6.81 फीसदी बढ़कर 125.69 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है जो पिछले साल समान अविध में 117.68 लाख हेक्टेयर था। इस तरह से कपास का बोआई क्षेत्र, सामान्य क्षेत्र 125.57 लाख हेक्टेयर के भी पार पहुंच गया है।
धान के अलावा चालू खरीफ सत्र में अबतक 129.55 लाख हेक्टेयर के साथ दलहन की बोआई में मामूली गिरावट आई है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 135.46 लाख हेक्टेयर था। अरहर का रकबा पिछले साल के 47.56 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 44.86 लाख हेक्टेयर में, यानी मामूली रूप से कम है। उड़द का रकबा 36.62 लाख हेक्टेयर है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 38.18 लाख हेक्टेयर था।
तिलहन बोआई का रकबा भी पिछड़ रहा है क्योंकि चालू खरीफ सत्र में दो सितंबर तक 188.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बोआई हुई है । एक साल पहले की समान अवधि में यह रकबा 189.66 लाख हेक्टेयर था।
हालांकि, मोटे-सह-पोषक अनाज के मामले में, बोआई बढ़कर 178.96 लाख हेक्टेयर हो गयी है, जो पिछले साल की समान अवधि में 171.62 लाख हेक्टेयर थी। नकदी फसलों में गन्ने का रकबा एक साल पहले की समान अवधि तुलना में थोड़ा बढ़कर 55.65 लाख हेक्टेयर से थोड़ा अधिक रहा। आंकड़ों से पता चलता है कि चालू खरीफ सत्र में अब तक जूट/मेस्टा खेती का रकबा 6.95 लाख हेक्टेयर पर लगभग अपरिवर्तित रहा।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जून-अगस्त की अवधि के दौरान देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की छह प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि, देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में इसी अवधि में 19 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूरे देश में सितंबर के दौरान मासिक वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इस साल कम मानसूनी बारिश के चलते धान की बोआई बुरी तरह प्रभावित हुई।
कृषि विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक 2022-23 फसल सत्र (जुलाई-जून) में चावल का उत्पादन पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर 12.9 करोड़ टन से 60 लाख से एक करोड़ टन तक कम हो सकता है। इसके अलावा अगर खरीफ फसलों का उत्पादन गिरता है तो महंगाई बढ़ सकती है क्योंकि देश का 80 फीसदी चावल इस सीजन में पैदा होता है। कृषि मंत्रालय 2022-23 खरीफ सीजन के उत्पादन को लेकर पहला अग्रिम अनुमान अगले महीने जारी करेगी।