केंद्रीय कोयला मंत्रालय में पहली बार ‘जस्ट ट्रांजिशन’ अनुभाग होगा, जो आर्थिक रूप से सूखे ईंधन पर निर्भर क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक कोयला खदान बंद करने की योजना का मसौदा तैयार करेगा।
विश्व बैंक 11.5 लाख डॉलर की सहायता प्रदान करेगा और विभिन्न हितधारकों, खास तौर पर खदान श्रमिक संघों के साथ सलाह से एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार करेगा। भारत द्वारा वर्ष 2070 के अपने शून्य कार्बन लक्ष्य की घोषणा के बाद से ऐसा पहली बार है कि नीति निर्माताओं ने कोयला उत्पादक क्षेत्रों में जस्ट ट्रांजिशन पर चर्चा की शुरुआत की है। जस्ट ट्रांजिशन सुरक्षित आजीविका, जमीन की बहाली और खनन क्षेत्रों के पास पुनर्वास सुनिश्चित करता है। यह किसी खदान के बंद होने के बाद समुदायों के पुन: रोजगार तथा कोयले और संबद्ध उद्योगों पर निर्भर क्षेत्रों की आर्थिक स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करता है। कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अब कोल इंडिया (सीआईएल) ने पुरानी खदानों को बंद करना शुरू कर दिया है, इन क्षेत्रों को खनन से पहले वाले हालात में बहाल करने की जरूरत है।