उड़ीसा का लघु उद्योग (एसएसआई) ब्रांडेड उपभोक्ता बाजार का बड़ा हिस्सा बनने की तैयारी कर रहा है। अब केंद्र ने ब्रांडेड उत्पादों के लिए एसएसआई की कलपुर्जा बनाने वाली इकाइयों पर उत्पाद शुल्क हटाने का फैसला किया है।
एसएसआई की इन इकाइयों पर फिलहाल 4 और 22 फीसदी के बीच उत्पाद शुल्क लागू है। अधिकांश एसएसआई इकाइयां 14 फीसदी का उत्पाद शुल्क चुकाती हैं और अब केंद्र इस उत्पाद शुल्क को हटाए जाने के लिए आगे आया है।
राज्य में चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स उड़ीसा में तकरीबन 59,000 एसएसआई के लिए ब्रांडेड कंपनियों से ठेके दिलाने के लिए पहल शुरू करेगा। अब तक उड़ीसा में महज 2 एसएसआई ही सौन्दर्य प्रसाधन और व्यक्तिगत उत्पादों के एफएमसीजी सेगमेंट में ब्रांडेड कंपनियों के लिए कलपुर्जों का निर्माण करती हैं।
राज्य की एसएसआई इकाइयों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हिमाचल प्रदेश सरकार ने एफएमसीजी क्षेत्र में लगी इकाइयों के लिए उत्पाद शुल्क हटाए जाने और 10 वर्षों के लिए आय कर से मुक्त किए जाने की पहल की है। ये एसएसआई इकाइयां इस क्षेत्र में अच्छा कारोबार कर रही दोनों कंपनियों के नक्शे कदम पर चलने की योजना बना रही हैं।
उत्कल चैम्बर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष निरंजन मोहंती कहते हैं, ‘केंद्र की ओर से चलाई जाने वाली यह एक अहम पहल है। इससे ब्रांडेड कंपनियों के लिए कलपुर्जों का निर्माण करने के लिए एसएसआई को बढ़ावा मिलेगा। इससे इनके उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीददारी के करण इनकी ब्रांडेड पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा और एसएसआई इससे लाभान्वित होंगी।’
1.5 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली एसएसआई इकाई को 4 फीसदी और 22 फीसदी के बीच उत्पाद शुल्क चुकाना पड़ता है। यह भी प्रावधान है कि एक बार जब एसएसआई का कारोबार 4 करोड़ रुपये को पार कर जाता है, इसे उत्पाद शुल्क की छूट हासिल करने वाली इकाइयों की सूची से हटा दिया जाता है।
फिलहाल राज्य की एसएसआई इकाइयां राज्य में टेक्स्टाइल और अन्य क्षेत्रों की ब्रांडेड कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। मोहंती ने कहा, ‘एक बार जब सरकार एसएसआई के लिए दरवाजे खोल देगी, हम इस स्थिति का लाभ उठाने में सक्षम हो जाएंगे।’