आदित्य बिड़ला समूह की वित्तीय सेवा कंपनी आदित्य बिड़ला कैपिटल अब रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (आरएनएलआईसी) में 51 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल हो गई है। आरएनएलआईसी दिवालिया कंपनी रिलायंस कैपिटल की इकाई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रिलायंस कैपिटल के लिए नियुक्त प्रशासक द्वारा आरएलएलआईसी में हिस्सेदारी की बिक्री की जा रही है। आरएनएलआईसी में रिलायंस कैपिटल की 51 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि शेष 49 फीसदी हिस्सेदारी जापान की कंपनी निप्पॉन की है।
कनाडा की कंपनी सन लाइफ के साथ एक अन्य संयुक्त उद्यम आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में आदित्य बिड़ला कैपिटल की बहुलांश हिस्सेदारी है। आरएनएलआईसी के सफल अधिग्रहण से आदित्य बिड़ला कैपिटल को अतिरिक्त बाजार हिस्सेदारी हासिल होगी। कंपनी भारत में जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा को उभरते क्षेत्र के रूप में देखती है।
आईआरडीए के आंकड़ों के अनुसार, नए कारोबारी प्रीमियम के लिहाज से आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस की बाजार हिस्सेदारी इस साल सितंबर में 1.88 फीसदी थी जबकि रिलायंस निप्पॉन की बाजार हिस्सेदारी 0.27 फीसदी थी।
आरएनएलआईसी रिलायंस कैपिटल की एकमात्र ऐसी सहायक कंपनी है जिसे गैर-बाध्यकारी बोली जमा कराने की अंतिम तिथि बीत जाने के बावजूद एक भी बोली प्राप्त नहीं हुई। बोली जमा कराने की अंतिम तिथि 29 अगस्त थी। दूसरी ओर, रिलायंस कैपिटल के अन्य कारोबार के लिए 14 गैर-बाध्यकारी बोलियां प्राप्त हुई थीं।
बाद में टॉरंट ग्रुप ने आरएनएलआईसी के लिए बोली लगाने के लिए निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस के साथ साझेदारी की। इस लेनदेन के एक करीबी बैंकर ने कहा कि प्रशासक द्वारा नियुक्त एक मूल्यांकनकर्ता ने इस जीवन बीमा कंपनी का मूल्यांकन 5,800 करोड़ रुपये आंका है। इसलिए टॉरंट और बिड़ला दोनों को इस मूल्यांकन से अधिक बोली लगानी होगी।
आदित्य बिड़ला कैपिटल के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया। यदि बोली सफल रही तो अहमदाबाद की कंपनी टॉरंट ग्रुप इस निवेश के जरिये वित्तीय सेवा कारोबार में दस्तक देगी। बिजली, शहरी गैस वितरण और फार्मास्युटिकल्स जैसे क्षेत्रों में वह पहले से ही मौजूद है।
अगस्त में सभी कारोबार सहित रिलायंस कैपिटल के लिए लेनदारों की समिति (सीओसी) को छह बोलियां प्राप्त हुई थीं। बोलीदाताओं में टॉरंट ग्रुप के अलावा इंडसइंड इंटरनैशनल, ओकट्री, कॉस्मिया फाइनैंशियल, ऑटम इन्वेस्टमेंट और बी-राइट रियल एस्टेट शामिल हैं। इन कंपनियों ने रिलायंस कैपिटल के लिए 4,000 करोड़ रुपये से 4,500 करोड़ रुपये के दायरे में सांकेतिक बोली जमा कराई है। उनकी पेशकश जांच-परख की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करती है।
मुनाफा कमाने वाली रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कारोबार के लिए पीरामल ग्रुप ने 4,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है जबकि ज्यूरिख इंश्योरेंस की पेशकश 3,500 करोड़ रुपये है। निजी इक्विटी फर्म एडवेंट ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस के लिए सबसे अधिक 7,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है।
अब पीरामल और ज्यूरिख साथ मिलकर बोली लगाने के लिए बातचीत कर रही हैं। इन बोलीदाताओं ने जांच-परख की प्रक्रिया में देरी होने का हवाला देते हुए बाध्यकारी बोली के लिए अगले साल के आरंभ तक समय बढ़ाने की मांग की थी लेकिन उन्हें अक्टूबर के अंत तक बोली जमा कराने के लिए कहा गया है। बाध्यकारी बोली जमा कराने की अंतिम तिति 31 अक्टूबर है।