अदाणी समूह ने अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी अधिग्रहण के वित्त पोषण के लिए इन कंपनियों में अपनी पूरी 63.1 प्रतिशत हिस्सेदारी गिरवी रख दी है। इन कंपनियों ने मंगलवार को स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि अंबुजा के अलावा, उसकी सहायक इकाई एसीसी में भी करीब 57 प्रतिशत हिस्सेदारी भी कई वैश्विक बैंकों के पास गिरवी रखी गई है।
अंबुजा का बाजार पूंजीकरण मंगलवार को 1.13 लाख करोड़ रुपये था, जिससे अदाणी के हिस्से की वैल्यू आज के बंद भाव के हिसाब से 71,988 करोड़ रुपये दर्ज की गई। एसीसी में 57 प्रतिशत गिरवी हिस्सेदारी का मूल्य 29,175 करोड़ रुपये है। दोनों कंपनियों की गिरवी हिस्सेदारी का मूल्य 1.01 लाख करोड़ रुपये है। अधिग्रहण के बाद, अंबुजा सीमेंट्स में अदाणी की हिस्सेदारी 63.13 प्रतिशत और एसीसी में 56.69 प्रतिशत हो गई है।
अदाणी समूह की इकाइयों ने स्विटजरलैंड की सीमेंट कंपनी होल्सिम की हिस्सेदारी के लिए 6.4 अरब डॉलर का भुगतान किया है।
इस सौदे को 14 अंतरराष्ट्रीय बैंकों से प्राप्त हुई 4.5 अरब डॉलर की कुल पूंजी के जरिये वित्त पोषित किया गया था। बार्कलेज बैंक पीएलसी, डीबीएस बैंक, डॉयचे बैंक एजी, एमयूएफजी बैंक और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने इस सौदे के लिए मुख्य प्रबंधकों के तौर पर जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा, बीएनपी पारिबा, सिटीबैंक, एमिरेट्स एनबीडी बैंक, फर्स्ट अबू धाबी बैंक, आईएनजी बैंक, इंटेसा सैनपाउलो एसपीए, मिजुओ बैंक, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन और कतार नैशनल बैंक ने भी इस सौदे के लिए मुख्य प्रबंधक के तौर पर काम किया।
अंबुजा सीमेंट्स ने कहा कि अदाणी समूह के अधिग्रहण उद्यम एंडेवर ट्रेड ऐंड इन्वेस्टमेंट और एक्सेंट ट्रेड ऐंड इन्वेस्टमेंट ने डॉयचे बैंक एजी, हांगकांग ब्रांच के साथ इस साल 25 जुलाई को उधारी हासिल की।
बैंकरों का कहना है कि संबद्ध कंपनी के गिरवी शेयरों से कोष उगाही एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था है, जिस पर दुनियाभर की सभी कंपनियां अमल करती हैं।
पिछले सप्ताह अंबुजा सीमेंट्स के नए बोर्ड ने अदाणी समूह को तरजीही वारंट आवंटन के जरिये अंबुजा में 20,000 करोड़ रुपये लगाने को स्वीकृति दी। इस कोष का इस्तेमाल कंपनियां अगले पांच साल में अपनी क्षमता दोगुनी बढ़ाकर 14 करोड़ टन सालाना तक पहुंचाने में करेंगी।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले दशक में कम निवेश को देखते हुए उन्होंने अनुमान जताया था कि कंपनी और फंड प्रबंधकों के निवेश से अंबुजा सीमेंट्स और एसीसी की क्षमता वर्ष 2025 तक 10 करोड़ टन सालाना पर पहुंच जाएगी।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सभी संयंत्रों में निवेश, विद्युत लागत में 100-125 रुपये प्रति टन की कमी, निजी कोयले के इस्तेमाल में वृद्धि और ग्रिड बिजली में कमी, कम मालभाड़ा लागत, लॉजिस्टिक में अदाणी समूह की दक्षता आदि से कुल लागत में प्रति टन 250-300 टन की कमी आने की संभावना है। कंपनियां होल्सिम के लिए मौजूदा रॉयल्टी भुगतान (बिक्री के 1 प्रतिशत) से प्रति टन 50-60 रुपये की बचत करेंगी, और एसीसी तथा अंबुजा सीमेंट्स के विलय से ऊपरी लागत कटौती का लाभ मिलेगा।’
शनिवार को अदाणी ने कहा था कि कंपनियों का अधिग्रहण समूह के लिए ऐतिहासिक अवसर था, क्योंकि एक ही झटके में समूह देश में दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट निर्माता बन गया है। 12 करोड़ टन सालाना क्षमता के साथ अल्ट्राटेक भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी है।