विमान बनाने वाली यूरोपीय कंपनी एयरबस भारतीय विमानन कंपनियों को की जाने वाली विमान आपूर्ति में लगभग 25 फीसदी कटौती करने की योजना बना रही है।
कंपनी ने ऐसा फैसला किंगफिशर एयरलाइंस को होने वाली आपूर्ति में हुई देरी को देखते हुए लिया गया है। एयरबस के अध्यक्ष किरण राव ने कहा, ‘अगले साल हम आपूर्ति में कुछ कटौती करेंगे। इसीलिए हम साल 2009 में 54 एयरबस विमानों के बजाय 40 विमानों की ही आपूर्ति करेंगे।’
हालांकि उन्होंने कहा कि किसी के ऑर्डर रद्द नहीं किए जाएंगे। आपूर्ति में देरी भी सिर्फ किंगफिशर एयरलाइंस के मामले में ही हो रही है। उन्होंने बताया, ‘जब किंगफिशर और डेक्कन का विलय हुआ था तब विजय माल्या ने दोनों कंपनियों के लिए आपूर्ति इस तरह सुनिश्चित की थी कि किसी किसी महीने में तीन एयरक्राफ्ट मिल जाते थे। दुनिया की सबसे बड़ी विमानन कंपनी भी इस तरह के बड़े ऑर्डर एक महीने में नहीं लेती हैं।
हमने सिर्फ विमानों की आपूर्ति को और बेहतर करने के लिए यह कदम उठाया है। हमनें इसे इस तरह से बदला है कि जितने विमानों की आपूर्ति हमें इस साल से 2012 के बीच में होनी थी वही आपूर्ति अब 2014 तक होगी।’
किंगफिशर ने पहले ही कहा था कि वह इस साल मिलने वाले लगभग 32 एयरबस ए 320 विमानों की आपूर्ति को टाल रही है। कंपनी ने भारत-अमेरिका के बीच चलने वाली नॉन स्टॉप उड़ानों के लिए ए 340 विमानों की आपूर्ति को भी टाल दिया है।
इस देरी के कारण कंपनी ने बेंगलुरु-लंदन की उड़ानों का परिचालन ए 330 से ही करना शुरू कर दिया है। जबकि कंपनी पहले बेंगलुरु-सैन फ्रांसिस्को के बीच नए ए 340 विमानों के साथ इस रूट पर उड़ान भरने की योजना बना रही थी। अब ये उड़ानें इस साल के अंत तक ही शुरू हो पाएंगी।
भारत में फिलहाल परिचालन कार्यों में लगे विमानों में एयरबस की बाजार हिस्सेदारी लगभग 53 फीसदी है। लेकिन अगर भारतीय विमानन कंपनियों की ओर से दिए गए ऑर्डरों को भी मिला लिया जाए तो एयरबस की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 70 फीसदी हो जाती है।