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भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) के चेयरमैन जी कृष्ण कुमार ने बताया कि कंपनी ने आगामी पांच वर्षों में 1.7 लाख करोड़ रुपये के निवेश का खाका तैयार किया है।
कंपनी इस निवेश का उपयोग अपने मुख्य कारोबार तेल शोधन और ईंधन विपणन के विस्तार के साथ-साथ पेट्रोरसायन और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में प्रवेश के लिए करेगी।
बीपीसीएल के पास देश की कुल तेल शोधन क्षमता का करीब 14 प्रतिशत और ईंधन खुदरा नेटवर्क का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। कंपनी अपनी मुख्य गतिविधियों का विस्तार करते हुए नए क्षेत्रों में भी कदम रखने की योजना बना रही है।
कंपनी के चेयरमैन ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि बीपीसीएल ने ‘प्रोजेक्ट एस्पायर’ के तहत एक नई महत्वाकांक्षी यात्रा का पहला चरण शुरू कर दिया है। इस पांच साल की रणनीतिक योजना के दो मुख्य स्तंभ हैं: मुख्य कारोबार को सुदृढ़ करना और भविष्य की परियोजनाओं में निवेश करना।
कृष्ण कुमार ने बताया कि कंपनी की मध्यम अवधि की रणनीति में दोहरी दिशा पर ध्यान दिया गया है। एक ओर, हम अपने मुख्य व्यवसाय—पेट्रोलियम उत्पादों की रिफाइनिंग और विपणन, साथ ही खोज और उत्पादन गतिविधियों—को विस्तार दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, पेट्रोरसायन, गैस, हरित ऊर्जा, गैर-ईंधन खुदरा और डिजिटल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी समान रूप से फोकस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “प्रोजेक्ट एस्पायर के तहत अगले पांच सालों में लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया जाएगा। इस निवेश का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण है, बल्कि दीर्घकालिक मूल्य सृजन के माध्यम से हमारे सभी हितधारकों के लिए लाभ सुनिश्चित करना भी है।” कंपनी का लक्ष्य है कि 2040 तक अपने परिचालन से शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन को हासिल किया जाए।
चेयरमैन ने कहा, ‘‘बीपीसीएल ने शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन के लिए खाका तैयार किया है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, कॉम्प्रेस्ड बायोगैस, कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण (सीसीयूएस), दक्षता में सुधार आदि शामिल हैं। इसके लिए 2040 तक चरणबद्ध तरीके से लगभग एक लाख रुपये के पूंजी व्यय की आवश्यकता होगी और कंपनी इसके लिए कमर कस ली है।’’
कंपनी की मुख्य कारोबार में निवेश की रणनीति देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण ऊर्जा और पेट्रोलियम उत्पादों की खपत में सालाना चार से पांच प्रतिशत की वृद्धि के अनुमान पर आधारित है। इसके अलावा, प्रमुख पेट्रोरसायन उत्पादों की मांग में सात से आठ प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “यह एकीकृत पेट्रोरसायन परिसरों के विकास और रिफाइनिंग क्षमता के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर है।”
बीपीसीएल अपनी तीन तेल रिफाइनरियों में से दो में पेट्रोरसायन परियोजनाओं को विकसित कर रही है। मध्य प्रदेश के बीना रिफाइनरी में 49,000 करोड़ रुपये का निवेश कर एथिलीन क्रैकर परियोजना पर काम हो रहा है, जिससे 2029 तक रिफाइनरी की मौजूदा तेल शोधन क्षमता 78 लाख टन से बढ़ाकर 1.1 करोड़ टन सालाना की जाएगी। इसके अलावा, केरल की कोच्चि रिफाइनरी में पॉलीप्रोपिलीन परियोजना स्थापित की जा रही है, जो 2027 तक चालू होने की संभावना है।
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