आजादी के 75वें साल में बंद होगी ब्रिटिश इंडिया

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:43 PM IST

जाने-माने लाल-इमली ब्रांड के ऊनी उत्पाद बनाने वाली ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन की लाल ईंटों की प्रसिद्ध इमारत ने कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर बना दिया था। लेकिन लंबे समय से यह बीमार पड़ी हुई है और सरकार अब 100 साल से ज्यादा पुरानी इस सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी को बंद कर सकती है। एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘सार्वजनिक उद्यम विभाग ने ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसीएल) और नैशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) को बंद करने का मसौदा जारी किया है। मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श पूरा होने के बाद कैबिनेट इस मामले पर विचार कर सकता है।’
एनटीसी कपड़ा मंत्रालय के तहत एक अन्य केंद्रीय सार्वजनिक उद्यम है। इसकी स्थापना अप्रैल 1968 में सरकार द्वारा अधिग्रहीत निजी क्षेत्र की बीमार कपड़ा इकाइयों के प्रबंधन के लिए की गई थी।
बीआईसीएल की स्थापना ब्रिटेन के उद्यमी सर अलेक्जेंडर मैकरॉबर्ट ने 1920 में की थी। यह सरकारी लिमिटेड कंपनी ‘लाल इमली’ और ‘धारीवाल’ ब्रांडों के नाम से ऊनी कपड़े बनाती थी। ये घर-घर में प्रसिद्ध थे। जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण आम बात थी, उस समय के समाजवाद के दौर में 1980 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस कपड़ा कंपनी का राष्ट्रीयकरण कर दिया। बीआईसीएल अपने राष्ट्रीयकरण से ही घाटे में चल रही है। बीआईसीएल को लगातार घाटे की वजह से 1991 में औद्योगिक एवं वित्तीय पुनर्गठन बोर्ड में भेजा गया और 1992 में बीमार घोषित कर दिया गया। सरकार ने नवंबर 2001, 2005 और 2011 में 211 करोड़ रुपये, 47.35 करोड़ रुपये और 338.04 करोड़ रुपये की पुनरुद्धार योजनाओं को मंजूरी दी। मगर ये सफल नहीं रही। दिसंबर 2019 में लोक सभा में कानपुर के सांसद के एक सवाल के जवाब में तत्कालीन कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी ने कहा, ‘नीति आयोग ने बीआईसीएल को बंद करने की 2017 में सिफारिश की है। कर्मचारियों के लंबित वेतन और अन्य बकाये कंपनी के बंद होने और सक्षम प्राधिकरण द्वारा मंजूर बंद करने की शर्तों के मुताबिक इसकी परिसंपत्तियों की बिक्री होने पर दिए जाएंगे।’बीआईसीएल को वित्त वर्ष 2021 में 106 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कंपनी के 1,209 कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के जरिये अपने बकायों के अंतिम निपटान का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार की नई सार्वजनिक क्षेत्र नीति के तहत सार्वजनिक उद्यम विभाग को प्रशासनिक विभागों के साथ विचार-विमर्श कर गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में बंद करने के लिए सीपीएसई को चिह्नित करने और ऐसे चिह्नित सीपीएसई के संबंध में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) से मुख्य मंजूरी लेने की जिम्मेदारी दी गई है।

First Published : August 10, 2022 | 11:02 AM IST