भारतीय कंपनियों को परमाणु आपूर्तिकर्ता संगठन (एनएसजी) से हरी झंडी के बाद कारोबार में काफी संभावनाएं नजर आ रही हैं।
भारतीय उद्योग परिसंघ ने कहा कि आने वाले समय में परमाणु संयंत्रों के निर्माण के लिए जरूरी पुर्जे और उपकरणों की आपूर्ति का केंद्र बनेगा। संघ के महाप्रबंधक च्रंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘साल 2030 तक लगभग 53,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन परमाणु ऊर्जा से ही किया जा सकेगा। इस करार से भारत के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अच्छी होगी।’
फिक्की ने इस बारे में कहा कि इससे देश में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत अंतरराष्ट्रीय परमाणु क्लब में शामिल हो जाएगा। इस करार से भारत को अपने परमाणु संयंत्रों के लिए ईंधन की आपूर्ति हो पाएगी। कई परमाणु संयंत्र ईंधन के अभाव में अपनी आधी क्षमता पर ही चल रहे हैं। अब भारत को परमाणु ईंधन आपूर्त करने वाले देशों में फ्रांस, रूस और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हो गए हैं।
ऐसौचेम के अध्यक्ष सान जिंदल ने कहा कि एनएसजी से भारत को मिली अनुमति कूटनीतिक प्रयासों का ही परिणाम है। पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष एल के मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा करने के लिए यह बहुत ही अच्छा कदम है। हमें उम्मीद है कि अमेरिकी कांग्रेस भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर तेजी से काम करेंगी। उन्होंने कहा, ’12वीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने 78,500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। यह 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य से काफी ज्यादा है।’