बिजली बचाने के लिए भी अब ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कॉम्पेक्ट फ्लोरेसेंट बल्बों (सीएफएल) के आयातित पुर्जों पर लगभग 40 फीसदी एंटी डंपिंग कर लगाने का प्रस्ताव दिया है।
अगर मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो सभी सीएफएल कंपनियां बल्बों के दाम में इजाफा करने की योजना बना रही हैं। जिससे एक बार फिर ग्राहकों पर महंगाई की मार पड़ने वाली है। सीएफएल बल्बों का निर्माण करने वाली कंपनियां भी कीमतों में 40 फीसदी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सीएफएल बल्बों की बिक्री में गिरावट आएगी। फिलहाल देश में सीएफएल बल्बों का निर्माण करने वाली लगभग 20 कंपनियां हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने 2002 में भी सीएफएल बल्बों पर 35 फीसदी एंटी डंपिंग कर लगाया था। जिस कारण सीएफएल बल्ब बनाने वाली कंपनियों ने पुर्जों का आयात करना शुरू किया था।
सीएफएल बल्ब बनाने वाले अजंता ग्रुप के प्रबंध निदेशक जयसुखभाई पटेल ने कहा, ‘सीएफएल बल्बों के इस्तेमाल ने काफी हद तक बिजली की कम खपत करते हैं। हालांकि अगर सरकार इसी तरह इस उद्योग पर एंटी डंपिंग कर लगाती रही तो आयातित पुर्जों के दाम और ज्यादा बढ़ जाएंगे। इसके बाद हमारे पास बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों के ऊपर डालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।’
उन्होंने बताया कि देश में सीएफएल बल्बों का कारोबार लगभग 1,500 करोड़ रुपये का है। हर साल भारतीय बाजार में लगभग 15 करोड़ सीएफएल बल्बों की बिक्री होती है। फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकार के इस कर के लगाए जाने के खिलाफ देश भर के सीएफएल निर्माता एक साथ है। अगर यह कर लगाया जाता है सीएफएल के दामों में बढ़ोतरी तो होगी ही।’
उन्होंने यह भी कहा कि इससे बल्बों की बिक्री घटेगी। उद्योग सूत्रों के अनुसार देश में बस दो ही कंपनियां ग्लास की टयूब बनाती हैं बाकी कंपनियां इसका आयात करती हैं और कर लगने से उनकी कीमतों में बढ़ोतरी होना लाजिमी है।