अहमदाबाद स्थित सीएफएम ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी ने पॉलिस्टर निर्माता जेबीएफ इंडस्ट्रीज की सुरक्षित परिसंपत्तियों की बिक्री की है। यह बिक्री रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाली एक इकाई को सरफेसी ऐक्ट (वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्निर्माण और सिक्योरिटीज इंटरेस्ट ऐक्ट के प्रवर्तन) के तहत निजी सौदे के जरिये की गई है।
आरआईएल 825 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ कंपनी के लिए एकमात्र बोलीदाता थी, जबकि बैंकों का बकाया 2,100 करोड़ रुपये है। रिलायंस के लिए जेबीफ इंडस्ट्रीज परिसंपत्तियों की खरीदारी फायदेमंद है, क्योंकि कंपनी बोटल-ग्रेड प्लास्टिक चिप, टेक्सटाइल-ग्रेड पॉलिस्टर यार्न और पॉलिस्टर फिलामेंट यार्न समेत विभिन्न पॉलिस्टर उत्पादों में लगी हुई है। आरआईएल ने इस अधिग्रहण पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है। जेबीएफ ने सीएफएम ऐसेट्स द्वारा बेची गई सुरक्षित परिसंपत्तियों की पुष्टि की है, जिसे उसके ऋणदाताओं ने खरीद लिया था।
5,000 करोड़ रुपये की ऋण चूक के बाद जेबीएफ इंडस्ट्रीज की सहायक इकाई जेबीएफ पेट्रोकेमिकल्स को बेचने के लिए अलग प्रक्रिया आईबीसी, 2016 के तहत चल रही है। कंपनी में वैश्विक निजी इक्विटी दिग्गज केकेआर एंड कंपनी का 1,000 करोड़ रुपये का निवेश है। कंपनी को इस साल जनवरी में कर्ज समाधान के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट द्वारा स्वीकृत किया गया था।
जेबीएफ इंडस्ट्रीज में 20 प्रतिशत हिस्सा खरीदने वाली केकेआर इस बिक्री प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही थी, लेकिन एक ऋणदाता जेपीएल के कर्ज समाधान के लिए एनसीएलटी-अहमदाबाद की शरण में चला गया। पैतृक कंपनी को उसके एक ऋणदाता द्वारा इरादतन डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया।
जेबीएफ इंडस्ट्रीज की स्थापना यार्न टेक्स्चराइजिंग कंपनी के तौर पर वर्ष 1982 में की गई थी और बाद में उसने पॉलिस्टर वैल्यू चेन में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया।
मुख्य तौर पर जेबीएफ पॉलिस्टर चिप कंपनी (टेक्स्टाइल ग्रेड और बोटल ग्रेड) कंपनी है और उसकी क्षमता 608 केटी सालाना और पॉलिस्टर धागा क्षमता 352 केटी सालाना है। घरेलू बाजार में स्वयं की पहचान बनाने के बाद जेबीएफ ने वर्ष 2008 में वैश्विक बाजारों में प्रवेश किया और रास अल खैमा, संयुक्त अरब अमीरात में पेट चिप्स और बोपेट फिल्म संयंत्रों की स्थापना की। यूएई की कंपनी को भी दिवालियापन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2014 में, उसने बहरीन में 90 केटी सालाना क्षमता और बेल्जियम के जील में 390 केटी सालाना क्षमता वाले बोटल ग्रेड पेट चिप संयंत्र के साथ बोपेट फिल्म इकाई की शुरुआत की। लेकिन वर्ष 2017 तक, उसे वैश्विक परिचालन में नुकसान की वजह से नकदी प्रवाह में असमानता की वजह से समस्याएं होने लगीं, क्योंकि तब उसका कर्ज भी बढ़ने लगा था। अगस्त 2018 में, केकेआर ने घोषणा की कि वह जेपीएल में हिस्सेदारी खरीदेगी, लेकिन सौदा सफल नहीं हो सका।