तेजी से बढ़ता कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी क्षेत्र टॉरंट फार्मास्युटिकल्स जैसी बड़ी औषधि कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। कंपनी इस श्रेणी में एक बड़ा अधिग्रहण करने की तैयारी कर
रही है।
खबरों के अनुसार, टॉरंट फार्मा क्यूरेशियो हेल्थकेयर का अधिग्रहण करने के लिए तैयार है जो करीब 2,100 करोड़ रुपये के स्किनकेयर उत्पाद बनाती है। करीब 240 करोड़ रुपये के कारोबार वाली इस कंपनी के पास 6,000 डॉक्टरों द्वारा सिफारिश किए गए करीब 50 दवाएं हैं। करीब 700 वितरकों के नेटवर्क वाली इस कंपनी का मूल्यांकन प्रीमियम पर किया गया है।
क्यूरेशियो के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी ब्रांड पोर्टफोलियो ने इसे आकर्षक बना दिया है। उन्होंने कहा, ‘डर्मेटोलॉजी का औसत पर्चा मूल्य अधिक है क्योंकि दवाएं अपेक्षाकृत महंगी होती हैं। कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी उत्पादों में वृद्धि के साथ इसका औसत पर्चा मूल्य करीब 1,000 रुपये है।’
टॉरंट फार्मा के अलावा जायडस लाइफसाइंसेज, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज और जेबी केमिकल्स भी कथित तौर पर क्यूरेशियो के अधिग्रहण की दौड़ में शामिल हैं। भारत में करीब 11,400 करोड़ रुपये का डर्मा बाजार सालाना 7 से 8 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। उद्योग के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि मुंहासे, बालों के झड़ने और रूसी जैसे कॉस्मेटिक डर्मेटोलॉजी उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
ये उत्पाद मूल्य नियंत्रण के दायरे से बाहर हैं और इसलिए इन पर विनिर्माताओं को अच्छा मार्जिन मिलता है। क्यूरेशियो के उत्पाद पोर्टफोलियो में बाल, शरीर, चेहरा और शिशु से संबंधित उत्पाद शामिल हैं। पेडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी एक अन्य ऐसा क्षेत्र है जहां माता-पिता डॉक्टरी सलाह वाले उत्पादों की मांग करते हैं जिनमें साबुन और शैंपू तक शामिल होते हैं।
उद्योग के एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘एक जानीमानी कंपनी के टैल्कम पाउडर के संबंध में हालिया विवाद के मद्देनजर कई माता-पिता डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपने बच्चों के लिए स्किनकेयर उत्पादों की मांग करते हैं। ऐसे में यदि दमदार मार्केटिंग ताकत वाली कंपनी उन उत्पादों को आगे बढ़ाती है तो वे तेजी से वृद्धि दर्ज कर सकते हैं।’
एडलवाइस के विश्लेषकों ने टॉरंट फार्मास्युटिकल्स की पहली तिमाही की समीक्षा में कहा कि भारतीय बाजार में कंपनी के प्रदर्शन में सुधार हो रहा है।
ब्रोकरेज ने कहा, ‘टॉरंट फार्मा ने भारतीय बाजार में लगातार चार तिमाहियों के दौरान दो अंकों में वृद्धि दर्ज की है। वृद्धि को मुख्य तौर पर मूल्य वृद्धि और नए लॉन्च से बल मिला। सेल्स टीम में विस्तार का फायदा आगामी तिमाहियों में दिखेगा।’ ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि सभी दवा कंपनियों ने उच्च एकल अंक में मूल्य वृद्धि की है। ऐसे में टॉरंट फार्मा के ब्रांडों के बढ़ते मूल्य अंतर में अब कमी आएगी।
नए लॉन्च का वृद्धि में करीब 3 फीसदी योगदान है।
भारत टॉरंट फार्मा का प्रमुख बाजार है जो इसके कुल राजस्व में 74 फीसदी योगदान करता है। भारत में अधिग्रहण करने के लिए कंपनी का रुख आक्रामक रहा है। उसने यूनिकेम के घरेलू कारोबार का अधिग्रहण 3,600 करोड़ रुपये में किया था।