टाटा मोटर्स की छोटी कार का विरोध कर रहे किसानों ने कंपनी को आवंटित 997 एकड़ में से कम से कम 300 एकड़ जमीन किसानों को वापस किए जाने का दावा किया है।
जबकि राज्य सरकार का कहना है कि वेंडर पार्क की जमीन में से सिर्फ 40 एकड़ जमीन ही वापस की जाएगी। विरोध कर रहे लोगों ने यह दावा पश्चिम बंगाल के गवर्नर गोपाल कृष्ण गांधी द्वारा गठित टीम के कंपनी की साइट का दौरा करने के बाद किया है।
पिछले महीने टाटा मोटर्स ने सिंगुर संयंत्र में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए नैनो का निर्माण कार्य रोक दिया था। उन्होंने ने यह भी कह दिया था कि अगर सिंगुर में हालात नहीं सुधरते हैं तो कंपनी इस परियोजना को किसी और राज्य में शुरू कर देगी।
लौटेगी और जमीन
कृषि जमीन रक्षा समिति के संयोजक बेचाराम मन्ना ने कहा कि पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) और पश्चिम बंगाल राज्य विद्युत बोर्ड के पास भी ऐसी जमीन है जिसे किसानों को वापस किया जाना चाहिए।
मन्ना उन चार लोगों की समिति में से हैं जिसे विरोध कर रहे किसानों को जमीन वापस करने की संभावनाएं ढूंढने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व डब्ल्यूबीआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुब्रत गुप्ता और हुगली की जिला अधिकारी नीलम मीणा कर रही हैं। जबकि किसानों की तरफ से सिंगुर से तृणमूल कांग्रेस के नेता रविन्द्रनाथ भट्टाचार्य इस बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं।
निर्माण अभी बाकी
मन्ना ने बताया कि अभी वेंडर पार्क की अधिकतर जमीन पर निर्माण होना बाकी है। उन्होंने कहा, ‘जमीन का यह हिस्सा किसानों को वापस किया जा सकता है।’ समिति के सदस्यों को मन्ना ने जो प्लॉट दिखाया वह कंपनी के प्रशिक्षण केंद्र के लिए था।
हालांकि इस बारे में सुब्रत गुप्ता ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और इस बात पर अड़िग रहे कि कंपनी को आवंटित जमीन में से सिर्फ 40 एकड़ जमीन ही किसानों को वापस की जाएगी। यह मुद्दा इसीलिए ज्यादा गर्म हो गया है क्योंकि कंपनी पहले ही कह चुकी है नैनो की निर्माण लागत कम रखने के लिए वेंडर पार्क का वहीं होना बहुत जरूरी है।
किसान जो 300 एकड़ जमीन वापसी की मांग कर रहे हैं उसमें 47 एकड़ डब्ल्यूबीआईडीसी और 14 एकड़ राज्य के बिजली बोर्ड के पास हैं। इसका मतलब है कि मन्ना और किसान वेंडर पार्क से लगभग 238 एकड़ जमीन वापस मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। यह नैनो के निर्माण के लिए लगाई जाने वाली सहायक कंपनियों को आवंटित जमीन का 80 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा है।
होंगे फेरबदल
टाटा मोटर्स का संयंत्र ही कुल परिसर के 645 एकड़ पर लगा हुआ है। इस परियोजना में छोटे मोटे फेरबदल किए जा सकते हैं क्योंकि सरकार इस परिसर के बाहर से लगभग 40 एकड़ जमीन वापस कर सकती है। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई है। लेकिन मन्ना इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि जल्द ही दोनों पक्षों में सहमति बन जाएगी।
उन्होंने लोगों की इस चिंता पर भी विराम लगा दिया कि वापस की जाने वाली जमीन किस हालत में मिलेगी? उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने जमीन को खेती लायक बनाकर वापस करने का वादा किया है। समिति को यह रिपोर्ट अगले हफ्ते देनी है।
दरअसल कुछ किसानों ने जबरन जमीन अधिग्रहण की बात कहते हुए विरोध प्रदर्शन भी किए थे। हाल ही में टाटा की सिंगुर छोड़ने की धमकी के बाद गांधी ने प्रदर्शन कारियों का नेतृत्व कर रही ममता बनर्जी और मुख्य मंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के बीच होने वाली बैठक की अध्यक्षता की थी।