नेक्स्ट ऑर्बिट वेंचर्स के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम – इंडियन सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (आईएसएमसी) ने सरकार को प्रति माह 40,000 चिप निर्माण क्षमता वाला फैब संयंत्र स्थापित करने का एक प्रस्ताव दिया है। यह संयंत्र मुख्य रूप से अगले पांच से 10 वर्षों के लिए निर्यात पर ध्यान केंद्रित करेगा।
कंसोर्टियम में केवल भारतीय कंपनियां ही शामिल होंगी, जिनमें से एक के पास 20 से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी। (आईएसएमसी ने कहा है कि खुलासा नहीं करने वाले समझौतों के कारण इस कंपनी का नाम नहीं बताया जा सकता है।) इसमें एकमात्र अपवाद टॉवर सेमीकंडक्टर होगी, जो एक इजराइली फैब कंपनी है। सूत्रों का कहना है कि यह 10 से 15 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगी। इंटेल टॉवर का अधिग्रहण कर रही है और वह संयंत्र में 65 नैनोमीटर एनालॉग चिप (इसके बाद 45 एनएम एनालॉग चिप) निर्माण के लिए उत्पादन श्रेणी की तकनीक प्रदान करेगी।
नेक्स्ट ऑर्बिट वेंचर्स फंड के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अजय जालान कहते हैं ‘टॉवर के अलावा बाकी साझेदार भारतीय कंपनियां हैं, जिनमें से एक कंपनी 20 से 30 प्रतिशत का खासी हिस्सेदारी ले रही है। यह कंपनी सेमीकंडक्टर की विश्व स्तरीय पेशेवर टीम द्वारा चलाई जाएगी, जो निवेशकों और हमारे फंड की तरफ से नियुक्त निदेशक मंडल को रिपोर्ट करेगी। इक्विटी और ऋण दोनों ही जरूरतों को पूरा कर दिया गया है।’
आईएसएमसी तीन अरब डॉलर का निवेश करेगा और कुछ दिनों पहले शुरू की गई सरकार की उस सेमीकंडक्टर प्रोत्साहन योजना को आगे बढ़ाने का एक प्रमुख लाभार्थी होगा, जिसमें अब उसे निवेश में 50 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी, जबकि पहले यह 40 प्रतिशत थी।
जालान ने कहा कि आईएसएमसी ने कर्नाटक में संयंत्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे प्रोत्साहन का प्रस्ताव दिया गया है जिसमें मुफ्त जमीन तथा 20 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी शामिल है। नतीजतन निवेशकों को परियोजना लागत का केवल 30 प्रतिशत भाग ही देना है। जालान ने कहा कि हम आधी रकम इक्विटी के जरिये और बाकी बैंकों से कर्ज के जरिये जुटाएंगे।’
निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने का कारण बताते हुए जालान कहते हैं कि शुरुआती पांच से 10 वर्षों के लिए अधिकांश क्षमता का निर्यात किया जाएगा क्योंकि भारत में अब तक चिप डिजाइन करने वाली कंपनियां नहीं हैं। सरकार की डिजाइन आधारित प्रोत्साहन योजना से भविष्य में चिप डिजाइन वाली महत्त्वपूर्ण कंपनियां तैयार होंगी। टॉवर भी 50 प्रतिशत क्षमता की खरीद करेगी।
आम तौर पर चिप संयंत्र अपने उत्पाद अंतिम ग्राहकों को नहीं बेचते हैं, बल्कि क्वालकॉम या मीडियाटेक जैसी चिप डिजाइन कंपनियों को बेचते हैं, जो उन्हें मोबाइल डिवाइस कंपनियों जैसे अंतिम उपयोगकर्ताओं को बेचती हैं।