मध्य प्रदेश में लेखन संबंधी विवाद पैदा होने के बाद अब अधिकारी राज्य के मुख्मयंत्री के मौखिक आदेशों और राजस्व मंत्री कमल पटेल के लिखित आदेशों को नजरअंदाज करने लगे हैं।
25 फीसदी के बजाय 250 तक डायवर्जन टैक्स की उगाही पर कथित तौर पर जान-बूझ कर की गई लेखन संबंधी भूल का खामियाजा मध्य प्रदेश के हर्दा, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में नए लघु एवं मझोले उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। इस समस्या से पहले से मौजूद एसएमई को भी दो-चार होना पड़ रहा है।
आश्चर्यजनक बात यह है कि हरदा राजस्व मंत्री कमल पटेल का गृह शहर भी है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 29 जून, 2007 को कुछ विसंगतियों को दूर करने के लिए ‘लघु उद्योग पंचायत’ की घोषणा की थी, लेकिन अधिकारियों ने इस घोषणा की उपेक्षा की।
हालांकि राजस्व मंत्री कमल पटेल ने पिछले महीने ग्वालियर के आयुक्त (भूमि रिकॉर्ड) को इस संबंध में एक लिखित निर्देश जारी किए थे और उनसे डायवर्जन टैक्स को उदार बनाए जाने का सुझाव दिया था। इस लिखित निर्देश की एक प्रति बिजनेस स्टैंडर्ड के पास भी उपलब्ध है। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि कर की दरें बेहद अधिक हैं और उद्योगों से 37,000 प्रति एकड़ सालाना की दर से कर की वसूली की जा रही है।
आयुक्त को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि उद्योग कर की इन अंधाधुंध दरों को सहन नहीं कर सकता। जब इस बारे में राजस्व मंत्री कमल पटेल, राजस्व विभाग की प्रधान सचिव स्नेहलता श्रीवास्तव, भूमि रिकॉर्ड आयुक्त विनोद कुमार और खंडवा के जिलाधीश एसबी सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस संबंध में कुछ कहने से इनकार कर दिया।
लैंड डायवर्जन में इरादतन बढ़ोतरी ने खंडवा में नए उद्योगों को प्रतिबंधित कर दिया है। पश्चिमी मध्य प्रदेश का यह जिला कपास की ओटाई, संवर्द्धन, कपास बीज की पेराई, तेल और दाल संवर्द्धन आदि के लिए प्रमुख रूप से जाना जाता है। खंडवा के उद्योग का कुल कारोबार अनुमानित रूप से 250 करोड़ रुपये का है।
खंडवा के उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि 1998 के बाद से इस जिले में एक भी इकाई नहीं आई है। उच्च लैंड डायवर्जन टैक्स, उच्च विद्युत शुल्क आदि की वजह से छोटे उद्योगपति इस शहर से दूरी बनाए हुए हैं। भाजपा की डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्री सेल खंडवा के अध्यक्ष और कॉटन सीड क्रशर्स एसोसिएशन के सचिव सुभाष बंसल ने बताया, ‘लेखन संबंधी चूक के कारण डायवर्जन टैक्स बढ़ कर 250 फीसदी तक पहुंच गया है।
जिलाधीश ने हमें लिखे पत्र में यह स्वीकार किया है कि लेखन संबंधी चूक के कारण इस कर में इजाफा हुआ है। राज्य सरकार ने इस विसंगति को दूर करने की इच्छा जताई है। मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं, लेकिन अधिकारी इस मामले में मुख्य बाधा बने हुए हैं।
कई मामलों में तो लैंड डायवर्जन टैक्स वर्तमान भूमि कीमतों से भी अधिक हो गया है जिससे हताश होकर उद्योग को भूमि खरीद की योजना को टालना पड़ा है।’ बंसल लघु उद्योग पंचायत में राज्य के मुख्यमंत्री के समक्ष भी यह मुद्दा उठा चुके हैं।
ये कर दरें अलग-अलग इलाकों में भिन्न हैं। उदाहरण के लिए सरकार ने सिंघरतलई औद्योगिक इलाके में वर्ष 1962 में 30 पैसे प्रति 100 वर्ग फुट की दर से लैंड डायवर्जन की उगाही की थी वहीं 1985 में यह दर बढ़ कर 16 रुपये और 1998 में 83 रुपये हो गई।