बढ़ते किराये और महंगाई से अछूता है देसी रिटेल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 7:03 PM IST

रिटेल क्षेत्र की कंपनी विशाल रिटेल लिमिटेड छोटे शहरों और कस्बों की तरफ रुख कर रही है। 1,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की इस कंपनी ने लागत घटाने और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए अपनी रणनीति में खासा फेरबदल किया है।


कंपनी का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष में कारोबार में तकरीबन 70 फीसद का इजाफा करना है। विशाल रिटेल के समूह अध्यक्ष अंबीक खेमका से उनकी रणनीतियों और रिटेल बाजार की संभावनाओं के बारे में ऋषभ कृष्ण सक्सेना ने बातचीत की। मुख्य अंश:

कहा जा रहा है कि महंगाई और बढ़ती लागत का रिटेल कारोबार पर तगड़ा असर पड़ेगा। ऐसी सूरत में आपको विशाल का भविष्य कैसा नजर आ रहा है?

बेशक, रिटेल पर महंगाई का असर पड़ रहा है, लेकिन हमारे कारोबार पर इसका असर पड़ना मुश्किल ही है क्योंकि देसी रिटेल कंपनियों का कारोबारी मॉडल बिल्कुल अलग है। हम राशन और कपड़े बेचते हैं, जिन्हें आदमी महंगाई में भी खरीदेगा। इसलिए हमें महंगाई की कोई फिक्र नहीं है।

लेकिन बढ़ते किराये से भी तो रिटेल कंपनियां परेशान हैं। आप इससे अछूते कैसे रहेंगे?

हम कभी प्राइम लोकेशन पर स्टोर नहीं खोलते। अमूमन मॉल में सबसे पीछे हमारा स्टोर होता है, जिसका किराया काफी कम होता है, लेकिन ग्राहक हमारे नाम से खिंचकर वहां भी पहुंच जाते हैं। जहां तक लागत का सवाल है, तो हम ज्यादातर उत्पाद ठेके पर बनवाते हैं और लागत का बोझ निर्माता पर पड़ता है। हम बड़ी मात्रा में सामान लेते हैं, इसलिए निर्माता को हमारी बात माननी पड़ती है।

पिछले वित्त वर्ष में आपका कारोबार कितना था? इस साल कारोबार में कितने इजाफे की उम्मीद है?

पिछले साल हमने 1050 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। उससे पिछले साल यह आंकड़ा 648 करोड़ रुपये था। हमें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान हम 1,800 करोड़ रुपये का कारोबारी आंकड़ा पार कर जाएंगे।

कारोबार में इतने इजाफे का भरोसा आपको कैसे है? आप यह लक्ष्य हासिल करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?

अभी छोटे शहरों और कस्बों में संगठित रिटेल की पहुंच न के बराबर है। समूचा दक्षिण भारत भी पड़ा है। वहां हम फ्रैंचाइजी के जरिये स्टोर खोल रहे हैं। अभी 83 शहरों में हमारे 130 स्टोर हैं। हमें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 700 तक पहुंच जाएगा।

दक्षिण भारत के लिए आपने कुछ खास तैयारी की हैं?

दक्षिण भारत में हमारे स्टोर में बिकने वाला सामान उत्तर भारत से अलग होगा। वहां हम दक्षिण भारतीय मिजाज के उत्पाद बेचेंगे। इसके अलावा वहां हम क्षेत्रीय विनिर्माण इकाई और गोदाम बनाएंगे। इससे स्टोर तक उत्पाद पहुंचाने में लगने वाला समय बचेगा और पैसा भी।

वाल मार्ट, कार्फू और टेस्को जैसे बहुराष्ट्रीय रिटेलर भारत में आने जा रहे हैं। उन्हें आप खतरा मानते हैं?

नहीं। हिंदुस्तान के मिजाज को हम बेहतर तरीके से पहचानते हैं। वैसे भी विदेशी रिटेलर साझा उपक्रम के जरिये आ रहे हैं, जिसमें ये पिछली सीट पर होंगे। इसलिए हमारा और इनका सीधा सामना नहीं होगा।

First Published : August 28, 2008 | 11:02 PM IST