गुजरात में जैव कचरे से बनेगी बिजली

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 5:45 PM IST

बिजली उत्पादन के लिए जीवश्म ईंधन को जलाने या अक्षय ऊर्जा के स्रोतों के इस्तेमाल पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए गुजरात सरकार बिजली बनाने के लिए जैव कचरे का इस्तेमाल करने वाली है।


अक्षय ऊर्जा के स्रोतों और पर्यावरण अनुकूल ईंधनों के इस्तेमाल पर जोर देने वाले गुजरात बिजली विकास एजेंसी (जीईडीए) ने अगले कुछ वर्षों में बायोमास के जरिये 400 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना बनाई है। जैव कचरे से बनाई जाने वाली बिजली परियोजना में लगभग 2 दर्जन कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है और सरकार पहले ही इन डेवलपरों से बिजली खरीदने के लिए दर को तय कर चुकी है।

इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है, ‘राज्य सरकार 3.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से डेवलपरों से बिजली खरीदेगी।’ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इन इकाइयों के लिए संयंत्र भार क्षमता 75-80 प्रतिशत तक अधिक होगी, जो सराहनीय है।

राज्य सरकार ने अक्षय ऊर्जा  के स्रोतों फिर चाहे वह पवन, सौर या बायोमास से बनने वाली कुल बिजली का 2 प्रतिशत खरीदने का फैसला लिया है। गुजरात में 37 जगहों की पहचान की जा चुकी है जहां बायोमास की अधिकता की संभावना है और बिजली परियोजनाएं लगाई जा सकती हैं।

बायोमास आधारित ऊर्जा के एक अन्य रूप तरल जैव ईंधन पर भी राज्य में कई कंपनियों की नजर है। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा केमिकल्स, एस्सार समूह, निर्माण प्रमुख शापूरजी पलोनजी, मुंबई की रॉयल एनर्जी और डी1-बीपी बायोफ्यूल्स ने जैव ईंधन के रूप में जैट्रोफा की खेती में अवसर तलाशने के लिए बड़ी योजनाएं तैयार की हैं। गुजरात सरकार ने नर्मदा क्षेत्र में जैव ईंधन की खेती खासकर जैट्रोफा की खेती के लिए 19 लाख एकड़ जमीन तय की है।

बायोमास के अलावा सौर ऊर्जा भी जीईडीए की योजना में काफी ऊपर है। एक दर्जन से भी अधिक कंपनियां सौर बिजली परियोजनाओं को अंतिम रूप देने वाली हैं, जिससे आने वाले वर्षों में 600 से 1,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। राज्य में सौर बिजली परियोजनाओं के साथ एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एडीएजी और टाटा पावर तैयार हैं।

First Published : August 20, 2008 | 1:32 AM IST