देश में 5जी सेवाएं शुरू की जा रही हैं लेकिन अब भी बड़ी तादाद में 2जी ग्राहक हैं। फिलहाल देश में इनकी संख्या करीब 35 करोड़ है। इन ग्राहकों को 4जी अथवा सीधे 5जी में लाना दूरसंचार कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि वह उम्मीद करते हैं कि भारत जल्द ही 2जी मुक्त हो जाएगा। वैसे रिलायंस जियो के पास कोई 2जी ग्राहक नहीं है क्योंकि वह पुराने नेटवर्क का संचालन नहीं करती है। रिलायंस जियो ने सीधे 4जी से अपना परिचालन शुरू किया था। जियो की प्रतिस्पर्धी भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के अलावा सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के पास भी 2जी ग्राहक हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि दूरसंचार कंपनियां अपने 2जी ग्राहकों को कब तक 4जी में ले आएंगी। साल 2021 में करीब 4 करोड़ 2जी ग्राहकों को 4जी में लाया गया था। उस रफ्तार से मौजूदा करीब 35 करोड़ 2जी ग्राहकों को 4जी अथवा 5जी में लाने में करीब नौ साल लग जाएंगे। आमतौर पर ग्राहक अपने 2जी मोबाइल फोन को हरेक तीन साल बाद बदलते हैं।
इस लिहाज से देखा जाय तो 2जी से 4जी में आने वाले मौजूदा ग्राहकों का बाजार करीब 10 करोड़ है। ऐसे में सवाल यह है कि वास्तव में कितने 2जी ग्राहकों को और कितनी तेजी से 4जी अथवा 5जी में लाया जाएगा।
मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा, ‘भारत में हर साल करीब 6 से 7 करोड़ 2जी फोन अब भी बिक रहे हैं। इनकी कीमत 800 रुपये से शुरू होती है। उचित सुविधाओं के साथ 4जी स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत 4,000 से 5,000 रुपये के दायरे में होगी। इसलिए 2जी ग्राहकों को 4जी में लाने की लागत काफी अधिक है।’
वर्ल्ड वाइड वेब फाउंडेशन द्वारा इसी संदर्भ में एक अध्ययन किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि भारत सहित दक्षिण एशिया में स्मार्टफोन की औसत लागत ग्राहक की औसत मासिक आय का करीब 40 फीसदी है। जबकि वैश्विक औसत महज 26 फीसदी है और उत्तरी अमेरिका में यह आंकड़ा महज 2 फीसदी है। इसके अलावा 4जी की शुल्क दरें भी 2जी के मुकाबले काफी अधिक हैं।
रिलायंस जियो ने 2जी ग्राहकों को करीब 1,100 रुपये में 4जी की पेशकश की थी। इसके तहत उसने ग्राहकों को एक 4जी फीचर फोन और एकमुश्त छह महीने के प्रीपेड शुल्क की पेशकश की थी। तीन साल में जियो महज 11 करोड़ 2जी ग्राहकों को ही अपने नेटवर्क में शामिल कर पाई।
कंपनियों का कहना है कि सब्सिडी लागत काफी अधिक है, इसलिए 2जी ग्राहकों को 4जी में लाना व्यावहारिक नहीं है। इससे उन्हें कोई फायदा नहीं होगा और इसलिए वे इससे दूर ही रहेंगी। अनुसंधान एजेंसी ग्लोबल डेटा की ओर से जारी इंडिया मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स 2022 के अनुसार, भारत में 2026 तक 32.9 करोड़ 5जी ग्राहक होंगे। यदि ग्राहकों की कुल संख्या मौजूदा स्तर पर बरकरार रहती है तो यह महज 30 फीसदी ग्राहक होंगे। शेष ग्राहक 2जी अथवा 4जी श्रेणी में होंगे।