विश्लेषकों का कहा है कि अगले कुछ महीनों के दौरान सेकंडरी बाजार में अनिश्चितता का प्रभाव प्राथमिक बाजार की गतिविधि पर भी दिखने का अनुमान है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय उद्योग जगत या तो सूचीबद्धता में विलंब करेगा या अपनी कोष उगाही योजनाओं में बदलाव लाएगा। प्राइम डेटाबेस के आंकड़े से पता चलता है कि कैलेंडर वर्ष 2022 में अब तक 16 कंपनियों के आईपीओ बाजार में आए और मई 2022 तक 40,311 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई थी।
निर्मल बांग में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य कार्याधिकारी राहुल अरोड़ा ने कहा, ‘जब तक जरूरी न हो, प्रवर्तक अपनी कोष उगाही जरूरतों को टालेंगे, क्योंकि कर्ज महंगा हो रहा है और उनकी पूंजी 6 महीने पहले जैसा प्रतिफल नहीं देगी। समेकित आधार पर, जब तक हालात सही नहीं हीं जाते, कॉरपोरेट भारत इंतजार करो और देखो की रणनीति अपनाएगा।’
आईपीओ विकल्प के जरिये उनके लिए सबसे बड़ी कोष उगाही भारतीय जीवन बीमा निगम की पेशकश थी, जिससे प्राथमिक बाजार से करीब 20,000 करोड़ रुपये जुटाए गए। हालांकि उसका शेयर तब से गिरावट में बना हुआ है और इसमें अप्रैल 2020 में उसके निर्गम भाव से अब तक करीब 28 प्रतिशत की कमजोरी आ चुकी है। पिछले 6 महीनों में, मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सख्त मौद्रिक नीति की आशंका, रूस-यूक्रेन युद्ध और जिंस कीमतों पर उसके प्रभाव, खासकर कच्चे तेल से दुनियाभर के कई इक्विटी सूचकांकों में गिरावट को बढ़ावा मिला है। बीएसई के सेंसेक्स और निफ्टी-50 में भी इस अवधि के दौरान करीब 7-7 प्रतिशत की कमजोरी आई है।
बढ़ती ब्याज दरें भी कॉरपोरेट जगत के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं, क्योंकि इनसे कर्ज के जरिये कोष उगाही महंगी हो जागी। वेलेंटिस एडवायजर्स के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक ज्योतिवर्द्धन जयपुरिया का कहना है कि यह अच्छी बात है कि भारतीय उद्योग जगत का कर्ज स्तर काफी कम है।
मार्जिन के हिसाब से उनका मानना है कि ऐसी कुछ कंपनियां हो सकती हैं जो सुस्त अर्थव्यवस्था और कुछ हद तक पूंजी उगाही में समस्या की वजह से अपने पूंजीगत खर्च कार्यक्रम में नरमी ला सकती हैं।
जयपुरिया ने कहा, ‘भारतीय उद्योग जगत का एक वर्ग नए जमाने की उन कंपनियों को लेकर चिंतित रहेगा जो नकदी नुकसान झेल रही थीं और इन नुकसान के वित्त पोषण के लिए निजी इक्विटी फंडों पर निर्भर थीं। हमारा मानना है कि जोखिमपूर्ण परिवेश से इस तरह की कई स्टार्टअप कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं और उन्हें सख्त इक्विटी परिवेश में डटे रहने के लिए लागत में बड़ी कटौती के लिए बाध्य होना पड़ेगा।’ प्राइम डेटाबेस की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 52 भारतीय कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 में आईपीओ के जरिये 1.11 लाख करोड़ रुपये जुटाए। वहीं वित्त वर्ष 2023 के लिए यह आंकड़ा 1.4 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें एलआईसी का आईपीओ भी शामिल रहा है। इस वित्त वर्ष के शुरू में कुल 54 कंपनियों ने बाजार नियामक सेबी को कोष उगाही के लिए अपने आवेदन सौंपे थे।