जेमकोवैक-19 टीके की कीमत होगी सामान

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:56 PM IST

भारत के पहले एमआरएनए कोविड19 टीके जेमकोवैक-19 की कीमत फाइजर-बायोनटेक और मॉडर्ना के टीकों के आसपास रखी जाएगी। इस टीके को बनाने वाली जिनोवा बायोफार्मास्यूटिकल्स ने यह बात कही है। सभी के लिए बूस्टर टीके के रूप में इस्तेमाल के लिए परीक्षण जल्द शुरू होंगे। इस टीके के बच्चों पर परीक्षण की भी योजना है।
इस टीके की खूबी यह है कि इसे अन्य टीकों की तरह खराब होने से बचाने के लिए शून्य से कम तापमान पर रखने की जरूरत नहीं है। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी एक जगह से दूसरी जगह भेजा सकता है। टीके को सरकार की आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद निजी बाजार में भी उतारा जा सकता है। जिनोवा जेमकोवैक-19 को सभी के लिए बूस्टर खुराक के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार परीक्षणों पर काम कर रही है। भारत ने अब तक अलग-अलग टीकों के बूस्टर को मंजूरी नहीं दी है।
जिनोवा फार्मास्यूटिकल्स के मुख्य परिचालन अधिकारी समित मेहता ने कहा कि अभी कीमत को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन इसकी कीमत वैश्विक एमआरएनए टीकों के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी रखी जाएगी। फाइजर बायोनटेक का एमआरएनए टीके की की कीमत अमेरिका में 19.5 डॉलर प्रति खुराक है, जबकि मॉडर्ना के टीके कीमत 25 डॉलर प्रति खुराक है।
इस बीच पुणे की जिनोवा अपनी टीका विनिर्माण क्षमता दोगुनी करने की तैयारी कर रही है। कंपनी की मौजूदा सालाना क्षमता 18 से 20 करोड़ खुराक है, जिसे अगले 4-5 महीनों में बढ़ाकर 40 करोड़ खुराक किया जाएगा। मेहता ने कहा कि वे अपनी बल्क उत्पादन क्षमता भी बढ़ाकर दोगुनी यानी सालाना एक अरब खुराक करने पर काम कर रहे हैं। जिनोवा की मूल कंपनी एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स के पास इंजेक्टेबल्स की अतिरिक्त क्षमता है, जहां फिलहाल कंपनी टीके का विनिर्माण कर रही है। मेहता ने कहा कि एमक्योर के पास लायोफिलाइजेशन क्षमता (फ्रीज ड्राइंग) है, जो इस टीके के विनिर्माण के लिए आवश्यक है।
मेहता ने कहा कि टीके की कीमत को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है, लेकिन इसकी कीमत वैश्विक एमआरएनए टीकों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखी जाएगी। इस टीके को हाल में भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। अब कंपनी सरकार की आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद टीके को पेश करने की तैयारी कर रही है। मेहता ने कहा कि उनके पास अपने एमआरएनए टीके की 70 लाख खुराकों का स्टॉक है, जिसे कसौली स्थिति केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला ने भी मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इस समय उनके पास अपने संयंत्रों में हर महीने 1.2 से 1.5 करोड़ खुराक बनाने की क्षमता है।
मेहता ने कहा, ‘हमने टीके का एक संस्करण खास तौर पर ओमीक्रोन स्वरूप के लिए विकसित किया है। हम इस संस्करण का परीक्षण भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल किए गए टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद सभी के लिए बूस्टर के रूप में करेंगे।’ मेहता ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय औषधि मानक संगठन (सीडीएससीओ) के पास पहले ही अपना परीक्षण प्रोटोकॉल जमा करा दिया है।
जेमकोवैक-19 के लिए उपलब्ध बाजार बूस्टर खुराक का होगा क्योंकि भारत की 95 फीसदी से अधिक आबादी को पहले ही टीके लग चुके हैं। कंपनी विदेशी बाजारों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को भी आपूर्ति करने की योजना बना रही है। जिनोवा ने डब्ल्यूएचओ पूर्व पात्रता के लिए आवेदन करने की योजना बनाई है।

First Published : June 30, 2022 | 1:18 AM IST