जनरल मोटर्स (जीएम) ने आज कहा कि उसने अपना भारतीय कार विनिर्माण संयंत्र चीन की कंपनी ग्रेट वॉल मोटर्स को बेचने की योजना टाल दी है। कंपनी ने कहा है कि चीनी कंपनी द्वारा भारत में निवेश के लिए सख्त प्रावधान होने और नियामकीय मंजूरियां हासिल न होने के कारण ऐसा किया गया है।
जीएम ने अपने भारतीय कार विनिर्माण संयंत्र की बिक्री के लिए जनवरी 2020 में एसयूवी बनाने वाली चीन की कंपनी ग्रेट वॉल के साथ एक सौदा के लिए पहल की थी। इसके तहत ग्रेट वॉल 30 करोड़ डॉलर का भुगतान कर सकती है जो तेजी से उभर रहे भारतीय कार बाजार में अपनी मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए उसके 1 अरब डॉलर की निवेश योजना का हिस्सा था। इस समझौते को दो बार विस्तार दिए जाने के बावजूद उसकी अवधि 30 जून को खत्म हो गई।
जीएम इंटरनैशनल के कार्यकारी निदेशक (संचार) जॉर्ज स्विगोस ने कहा, ‘हम इस सौदे के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक नियामकीय मंजूरियां हासिल करने में विफल रहे।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी भारतीय रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और अब हम उस संयंत्र की बिक्री के लिए अन्य विकल्पों पर गौर करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि हमें उस परिसंपत्ति का उचित मूल्य मिल सकेगा।’
चीन की कंपनी ने भी इस सौदे के खारिज होने की पुष्टि की है। ग्रेट वॉल मोटर्स ने एक बयान में कहा, ‘ग्रेट वॉल मोटर्स भविष्य में भारतीय बाजार पर अपनी नजर बरकरार रखेगी और लगातार नए अवसरों को तलाशती रहेगी।’ इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए सरकार से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
चीन सहित पड़ोसी देशों से निवेश के मोर्चे पर भारत सरकार द्वारा अप्रैल 2020 में अपना रुख सख्त किए जाने से कुछ महीने पहले जीएम ने अपने भारतीय संयंत्र क बिक्री के लिए ग्रेट वॉल मोटर्स के साथ सौदा किया था। यह पहल सीमा पर तनाव के कारण खराब होते कूटनीतिक संबंधों के बीच भारत सरकार द्वारा चीन से कारोबार को हतोत्साहित करने की रणनीति के तहत किया गया था। इसी क्रम में भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देत हुए टिकटॉक सहित 300 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था।
जीएम ने साल 2017 के अंत में भारतीय बाजार में कारों की बिक्री बंद करने का निर्णय लिया था। वह अपनी एक संयंत्र की बिक्री एसएआईसी मोटर कॉर्प को पहले ही कर चुकी है जहां चीन की वाहन कंपनी अपने ब्रिटिश ब्रांड एमजी मोटर के तहत कारों का उत्पादन करती है।