आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज का आर्थिक मंदी के दौर में सीमेंट के दाम न बढ़ाए जाने की वजह से मुनाफा मार्जिन में 5 प्रतिशत की गिरावट रही।
ग्रासिम एसीसी, अल्ट्राटेक और अंबुजा सीमेंट के बाद देश की चौथी सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी है, जिसकी कुल क्षमता 1.6 करोड़ टन है। कंपनी के निदेशक एवं मुख्य वित्त अधिकारी डी डी राठी का कहना है, ‘इस साल हमारे मार्जिन में 55 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है।’ उन्होंने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों की वजह से मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
राठी ने कहा, ‘मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में उद्योग में कई नई क्षमताएं लगाई जाएंगी, उद्योग के लिए क्षमताओं का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2009 में लगभग 90 प्रतिशत तक गिर सकता है।’ वित्त वर्ष 2008 में घरेलू सीमेंट उद्योग की क्षमता का इस्तेमाल लगभग 94 प्रतिशत है। उनका कहना है, ‘वित्त वर्ष 2010 में हमारा अनुमान है कि क्षमता का इस्तेमाल 85 प्रतिशत तक गिर सकता है।’
85,000 करोड़ रुपये के सीमेंट उद्योग में वित्त वर्ष 2008 में 3.5 करोड़ टन और शामिल हो जाएगा। राठी का कहना है, ‘हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2010 में इतनी ही मात्रा की क्षमताएं और शामिल होंगी।’ बिड़ला समूह की कंपनी का कहना है कि सीमेंट की कीमतें बढ़ाने में रुकावट हो सकती है क्योंकि वित्त वर्ष 2009 में 9 से 10 प्रतिशत वृध्दि दर दिखाई नहीं दे रही।
उनका कहना है, ‘मांग में इजाफा हमारे अनुमानों से भी कम है, रियल एस्टेट में मंदी दिखाई दे रही है, बुनियादी ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं में भी इतना निवेश नहीं है, जिसकी हमें उम्मीद थी।’ हालांकि वित्त वर्ष 2010 में ग्रासिम कुछ राहत महसूस कर रही है।
राठी का कहना है, ‘वित्त वर्ष 2009 में वृध्दि दर 7 से 8 प्रतिशत रहेगी, लेकिन अगले वित्त वर्ष में भारत में वृध्दि दर में कुछ तेजी हो सकती है। हम मात्रा में होने वाले इजाफे पर ध्यान दे रहे हैं, न कि कीमतों पर।’ उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी बाजारों में सीमेंट की कीमतों पर मंदी का असर है। हालांकि दक्षिण में सीमेंट की कीमतें इस असर से महफूज हैं।