पिछली तिमाही के मुकाबले कैलेंडर वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान एशिया में उद्यम पूंजी फंडिंग में भारत की हिस्सेदारी में गिरावट नजर आई है। दूसरी तरफ तकनीकी कंपनियों पर आंतरिक कार्रवाई और पीई फंडों की आशंकाओं के बावजूद चीन ने बाजार हिस्सेदारी में बढ़त हासिल की है, जिनमें से कई तो देश में निवेश रोकने पर विचार कर रहे थे।
सीबी इनसाइट्स द्वारा किए गए डेटा विश्लेषण के आधार पर कैलेंडर वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में भारत की उद्यम पूंजी फंडिंग का हिस्सा तकरीबन आधा गिरकर 14 प्रतिशत रह गया (20.1 अरब डॉलर के कुल उद्यम पूंजी निवेश में से), जो दूसरी तिमाही में 22 प्रतिशत (29.8 अरब डॉलर के कुल उद्यम पूंजी निवेश में से) था फिर भी इसी अवधि के दौरान, एशिया में कुल वेंचर कैपिटल फंडिंग में चीन की हिस्सेदारी में 34 प्रतिशत से बढ़कर में 42 प्रतिशत हो गई, भले ही एशिया में कुल VC फंडिंग सिकुड़ गई।
अलबत्ता इस अवधि के दौरान एशिया में उद्यम पूंजी की कुल रकम में चीन की हिस्सेदारी कैलेंडर वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के 34 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर इस वर्ष की तीसरी तिमाही में 42 प्रतिशत हो गई, हालांकि एशिया में कुल फंडिंग में कमी आई है।
वैश्विक स्तर पर उद्यम पूंजी की रकम में भारत की हिस्सेदारी कैलेंडर वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के 5.8 प्रतिशत (112.68 अरब डॉलर की कुल वैश्विक उद्यम पूंजी फंडिंग में से) की तुलना में गिरकर इस वर्ष की तीसरी तिमाही में 3.75 प्रतिशत (74.5 अरब डॉलर की कुल वैश्विक उद्यम पूंजी फंडिंग में से) रह गई। इस अवधि के दौरान चीन की हिस्सेदारी कैलेंडर वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही के 9.05 प्रतिशत के मुकाबले कैलेंडर वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 11.4 प्रतिशत तक पहुंच गई।
एक तरफ वैश्विक उद्यम पूंजी फंडिंग में तिमाही आधार पर 34 फीसदी और एशियाई बाजार में 33 फीसदी तक की गिरावट आई है, दूसरी तरफ भारतीय उद्यम पूंजी फंडिंग में इससे कहीं अधिक की गिरावट आई है। चीन में यह गिरावट धीमी रही है।
कैलेंडर वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के दौरान भारत में उद्यम पूंजी फंडिंग 387 सौदों के लिए 10 तिमाही के निचले स्तर पर गिरकर केवल 2.8 अरब डॉलर रह गई। पिछली तिमाही (404 सौदों के लिए 6.6 अरब डॉलर) की तुलना में यह गिरावट 58 प्रतिशत रही। यह कैलेंडर वर्ष 2020 की दूसरी तिमाही के बाद से सबसे निचला स्तर रहा। उस समय कम से कम साफ वजह तो थी क्योंकि महामारी कोविड-19 ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था।
कैलेंडर वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में यह गिरावट सालाना आधार पर और भी तेज रही है क्योंकि इस तिमाही में पूंजी उद्यम फंडिंग कैलेंडर वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही के मुकाबले एक तिहाई से भी कम रही है, जब यह 9.8 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गई थी।
सौदों के आकार में भी भारत और चीन के बीच यह अंतर देखा गया है। तीसरी तिमाही में भारत के सबसे बड़े सौदे में अपग्रेड शामिल रही, जिसने 21 करोड़ डॉलर जुटाए और उसके बाद लेंसकार्ट का स्थान रहा, जिसने ने 20 करोड़ डॉलर जुटाए। चीन में सबसे बड़ा सौदा सेसेम टेक्नोलॉजिज द्वारा किया गया था, जिसने 50 करोड़ डॉलर जुटाए थे, जबकि सबसे छोटा सौदा 20 करोड़ डॉलर का था।