मंदी के बाद मॉल्स पर पड़ रही है महंगाई की करारी मार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 4:44 PM IST

महंगाई और मंदी ने शॉपिंग मॉल्स को भी अपनी जद में ले लिया है। कई छोटे दुकानदार जितनी तेजी से मॉल्स में जगह लेने के लिए जुगत भिड़ा रहे थे अब उतनी ही तेजी से वहां से खिसक रहे हैं।


हालांकि मॉल्स वाले इस बात को मानने के लिए कतई तैयार नहीं हैं कि बाजार में इस तरह के रुझान हैं लेकिन हाल में आई कुशमैन ऐंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली और एनसीआर में शॉपिंग मॉल्स में 22 फीसदी जगह खाली पड़ी है।

हालांकि मॉल्स चलाने वाले सीधे-सीधे इस बात को नहीं स्वीकार कर रहे हैं और इससे इनकार भी कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। दिल्ली के एक बड़े मॉल से हाल ही में अपना स्टोर हटाने वाले प्रतीक महाजन बताते हैं, ‘शुरू में तो सब कुछ ठीक था लेकिन धीरे-धीरे परिचालन लागत बढ़ती ही जा रही थी इसलिए मैंने मॉल को अलविदा कहना ही मुनासिब समझा।’ दरअसल प्रतीक तो महज एक उदाहरण भर हैं, इस तरह के लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। और मॉल मालिकों की पेशानी पर बल पड़ते जा रहे हैं। 

साकेत के ‘स्क्वायर वन’ मॉल के नागेंद्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि दरअसल मॉल्स के बीच आपस में बढ़ती प्रतिद्वंद्विता की वजह से इस तरह के हालात बन रहे हैं। वह बताते हैं कि कोई नया मॉल, दूसरे मॉल की तुलना में कम किराए की पेशकश देता है तो जाहिर है दुकानदार उधर जाना चाहेगा, भले ही बाद में वह सौदा उसके लिए महंगा साबित हो। हालांकि उनका मानना है कि ऐसा काम सिर्फ छोटे स्टोर चलाने वाले ही कर रहे हैं। लेकिन सिर्फ छोटे दुकानदार ही मॉल्स को अलविदा नहीं कह रहे हैं बल्कि बड़ी कंपनियों के स्टोर भी अब मॉल्स की बजाय दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं।

इस बाबत पीतमपुरा के सीटीसी मॉल के महाप्रबंधक विवेक बुद्धिराजा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को जानकारी दी कि हाई स्ट्रीट बाजार, मॉल्स के मुनाफे पर चोट करने लगे हैं। बुद्धिराजा के मुताबिक अब लगभग सभी बड़ी कंपनियों ने अपने स्टोर करोलबाग, राजौरी गार्डन जैसे हाई स्ट्रीट बाजारों में खोल लिए हैं, इसलिए लोगों के पास खरीदारी करने के लिए अपने पड़ोस के हाई स्ट्रीट बाजार में जाने का विकल्प भी खुल गया है।

इस तरह के ट्रेंड पर एक विश्लेषक का कहना है, ‘दरअसल मॉल्स में कई सुविधाओं के एवज में काफी किराया लिया जाता है और यहां पर आने वाली भीड़ में खरीदार कम ही होते हैं। इसलिए ही अब खासकर छोटे दुकानदारों का मॉल्स से मोहभंग होने लगा है। ‘ वहीं कुछ लोग मॉल्स की मुश्किलों का मुख्य कारण मांग की तुलना में अधिक आपूर्ति और महंगाई को मान रहे हैं।

कुछ मॉल्स के अब भी मजे

इस तरह के दौर में बढ़िया लोकेशन वाले और अत्याधुनिक मॉल अब भी बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। इनमें दक्षिण दिल्ली और खासकर महरौली -गुड़गांव रोड पर स्थित मॉल शामिल हैं। एमजी रोड पर स्थित ‘सहारा मॉल’ के संचालन से जुड़े सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रमुख जे के गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘बढ़िया लोकेशन की वजह से हमारे कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा है। हां इतना जरूर है कि सप्ताहांत की तुलना में बाकी दिनों में यहां पर कम भीड़ नजर आती है। ‘

हालांकि वह इस बात से इनकार नहीं करते कि मॉल्स के कारोबार में पिछले कुछ दिनों में कमी आई है। वह बताते हैं कि गुड़गांव ऐसे शहरों में है जहां डिमांड के मुकाबले में सप्लाई ज्यादा है। यहां पर तकरीबन पहले से ही 14 मॉल हैं जबकि एक दर्जन मॉल जल्द ही खुलने वाले हैं। मॉल्स की इस हालत पर केपीएमजी के कार्यकारी निदेशक जय मवानी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि  ‘मॉल्स के सामने जो समस्या आ रही हैं उसकी सबसे प्रमुख वजह ओवरसप्लाई है। इसके अलावा पोजीशनिंग और सही प्लानिंग न होने से भी मॉल्स वालों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।’

First Published : August 13, 2008 | 1:22 AM IST