मंदी के इस माहौल में मार्जिन के बारे में सोचना भी बेवकूफी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 8:08 PM IST

प्लाज्मा स्क्रीन, डिसप्ले उत्पाद, मॉनिटर और सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर के मामले में अमेरिका की व्यूसॉनिक कॉर्पोरेशन को दुनिया की सबसे अच्छी कंपनियों में शुमार किया जाता है।


लगभग 5,200 करोड़ रुपये की यह कंपनी भारत में भी अपना बाजार बढ़ा रही है। आईडीसी की रैंकिंग में व्यूसॉनिक इंडिया को हाल ही में तीसरी सबसे बड़ी डिसप्ले निर्माता कंपनी करार दिया गया है। डिसप्ले बाजार के हालात, मंदी, कंपनी की रणनीति और तमाम दूसरे पहलुओं पर व्यूसॉनिक इंडिया के कंट्री प्रमुख गौतम घोष से ऋषभ कृष्ण सक्सेना ने बातचीत की।

डिसप्ले बाजार में आपको बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। लेकिन आप खुद को दूसरी कंपनियों से किस तरह अलग मानते हैं? अव्वल होने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

अगर बाजार में 18 फीसद हिस्सेदारी का मतलब बड़ा खिलाड़ी होना है, तो बेशक हम हैं। लेकिन हम बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने के लिए जाने जाएं, तो बेहतर है। हमें लगता है कि आधुनिक से आधुनिक गुणवत्ता देने के मामले में हम दूसरी कंपनियों से आगे हैं। अव्वल होने के बजाय हम पहली तीन कंपनियों में अपना नाम चाहते हैं।

लेकिन आपके उत्पाद दूसरी कंपनियों के मुकाबले महंगे होते हैं। ऐसे में आम उपभोक्ता तक पहुंच बनाने में आप कैसे कामयाब हो पाएंगे?

बेशक हमारे उत्पाद महंगे हैं। लेकिन अत्याधुनिक तकनीक कम पैसों में तो नहीं मिल सकती। आम उपभोक्ताओं के लिए हम कीमत नहीं घटा सकते क्योंकि लागत इजाजत नहीं देती। वैसे भी, अगर आप हमारी तकनीक को देखेंगे, तो कीमत बिल्कुल ज्यादा नहीं लगेगी।

क्या इसका मतलब है कि व्यूसॉनिक इंडिया आम उपभोक्ता की कंपनी नहीं है क्योंकि भारत में तो ग्राहक कीमत पर ज्यादा ध्यान देते हैं?

ऐसा नहीं है कि हम आम उपभोक्ता से सरोकार नहीं रखते। हां, भारत में ग्राहक कीमत पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन उनका नजरिया बदल रहा है और वे भी तकनीकी बारीकियों पर ध्यान देने लगे हैं। हम ग्राहकों के परिपक्व होने का इंतजार कर रहे हैं।

बाजार की हालत इस समय अच्छी नहीं है। मार्जिन बरकरार रखने के लिए व्यूसॉनिक क्या कर रही है?

इस माहौल में तो मार्जिन की बात कहना अपराध है। सभी कंपनियां मार्जिन की बलि दे रही हैं और हम भी। हम अपना बिक्री नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं, ताकि मंदी दूर होने पर कारोबार बेहतर हो।

छोटे शहरों और कस्बों में आपको कितना बाजार दिख रहा है?

दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में भी नव धनाढय वर्ग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर उत्पादों को तरजीह देने लगा है। ग्राहकों की मानसिकता बदल रही है। अब बेहतर गुणवत्ता के लिए वे ज्यादा रकम खर्च करने को तैयार हैं। व्यूसॉनिक भी इस बदलाव को समझ रही है और छोटे शहरों में ज्यादा विस्तार की तैयारी कर रही है।

रिटेल के मोर्चे पर व्यूसॉनिक क्या कर रही है?

दिल्ली, मुंबई और तमाम बड़े शहरों में हमारे डीलर और सब डीलर हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ही हमारे तकरीबन 200 डीलर हैं। इसमें हम लगातार इजाफा कर रहे हैं। इसके अलावा बड़ी रिटेल कंपनियों मसलन रिलायंस डिजिटल, क्रोमा और जम्बो के साथ हम करार कर चुके हैं। दूसरी कंपनियों के साथ करार का भी हमारा इरादा है।

भारत में कई कंपनियां अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र खोल रही हैं। आपका भी ऐसा कोई इरादा है?

बिल्कुल नहीं। मॉनिटर बनाने में 82 फीसद पुर्जे बाहर से आते हैं। बाकी कंपनियां भी यहां उनकी असेंबलिंग भर करती हैं। निर्यात तो यहां से हो ही नहीं सकता। अगर कभी यहां तस्वीर बदलती है, तो व्यूसॉनिक भारत में भी विनिर्माण आधार लगाने के बारे में सोच सकती है।

लेकिन चीनी कंपनियों के सस्ते उत्पाद भी भारत आ रहे हैं। ऐसे में व्यूसॉनिक को क्या मुश्किल दिख रही है?

चीनी डंपिंग तो जबरदस्त परेशानी है। लेकिन इसमें हम कर ही क्या सकते हैं। सरकार को ही डंपिंग रोधी नीति और सख्त करनी होगी। दिक्कत यह है कि इन कानूनों के दायरे में स्थानीय निर्माताओं को सुरक्षा मिलती है, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को नहीं। डंपिंग रोधी कानून सख्त बनाकर भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों का ध्यान भी रखा जाना चाहिए।

First Published : September 8, 2008 | 11:43 PM IST