इन्फोसिस के को-फाउंडर और पूर्व सीईओ क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा है कि एक ही समय दो कंपनियों के लिए काम करना उचित नहीं है। यह आपके और कंपनी के बीच के विश्वास को कमजोर करता है।
मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मै यह समझ नहीं पा रहा कि आखिर नई पीढ़ी कहां से आ रही है। यदि आप किसी कार्य को 100 फीसदी देना चाहते है तो आपको उस कार्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध होना चाहिए। यदि आप किसी कंपनी में ट्रस्ट बनाना चाहते हैं तो आपको किसी एक संगठन के लिए ही काम करना चाहिए। आप एक ही समय दो-तीन कंपनियों के लिए कैसे काम कर सकते हैं?
उन्होंने आगे कहा कि यदि काम के बाद भी आपके पास समय है तो आपको सामाजिक कार्य या चैरिटी करना चाहिए। आप किसी एक संगठन में काम करिए और चैरिटी के लिए किसी एनजीओ में काम करिए।
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि जब मैं बोर्ड मेंबर नहीं था और इन्फोसिसके एक कर्मचारी के रूप में काम करता था तब भी मैंने न तो किसी और कंपनी के लिए काम किया और न ही और किसी प्रकार का निवेश किया था।
गोपालकृष्णन की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मूनलाइटिंग पर उद्योगों और कंपनियों की प्रतिक्रिया आ रही है। अभी हाल ही में आईबीएम इंडिया के हेड संदीप पटेल ने मूनलाइटिंग पर रिशाद प्रेमजी के विचार शेयर किए। प्रेमजी ने मूनलाइटिंग को एक धोखा बताया है।
इन्फोसिस ने अपने सभी कर्मचारियों को मूनलाइटिंग को लेकर आंतरिक ई-मेल के जरिए नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में एक साथ दो नौकरी करने से साफ मना किया गया है। जो कर्मचारी इन नियमों को नहीं मानेगा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक से लेकर जॉब से निकालने तक की कार्यवाही हो सकती है।
इन्फोसिस मूनलाइटिंग को लेकर काफी मुखर रही है। स्विगी जैसे स्टार्टअप अपने कर्मचारियों को मूनलाइटिंग की अनुमति देते हैं।