केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) के पूर्व प्रवर्तकों के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है लेकिन ऋणदाताओं को धोखाधड़ी वाले 40,000 करोड़ रुपये के खातों के मामले में पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस द्वारा 63 मून्स टेक्नोलॉजिज और डीएचएफएल के खिलाफ दायर अपील के फैसले का बेसब्री से इंतजार है। पीरामल ने नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी जिसमें डीएचएफएल के कर्जदाताओं को वित्तीय फर्म के धोखाधड़ी वाले खातों के मूल्यांकन के संबंध में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया था। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘यह केवल डीएचएफएल और लेनदारों का मामला नहीं है बल्कि भविष्य में दिवालिया मामलों और वसूली का भाग्य भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगा।’
डीएचएफएल की ऋण समाधान योजना के अनुसार पीरामल कैपिटल को ऋणदाताओं द्वारा कंपनी का नियंत्रण सौंप दिया गया था। लेकिन डीजीएफएल में 200 करोड़ रुपये के निवेश वाली कंपनी 63 मून्स टेक्नोलॉजिज ने पीरामल कैपिटल की ऋण समाधान योजना के खिलाफ एनसीएलएटी में एक याचिका दायर की थी। याचिका में डीएचएफएल के फर्जी खातों में 1 रुपये से 40,000 करोड़ रुपये तक मूल्य की परिसंपत्तियों के बारे में जानकारी दी गई थी।