बिजली बैकअप देने वाले उपकरण बनाने के लिए मशहूर कंपनी ल्युमिनस पावर टेक्नोलॉजिज ने दोपहिया बाजार और दूरसंचार बुनियादी ढांचे के कारोबार पर निगाह जमा दी है।
कंपनी इसी साल अक्टूबर में भारतीय बाजार में ई-बाइक उतारने जा रही है। इसके अलावा वह सहायक कंपनी ल्युमिनस टेलीइन्फ्रा के जरिये दूरसंचार बुनियादी ढांचा कारोबार में भी कमोबेश 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
ल्युमिनस पावर लगभग 450 करोड़ रुपये के सार समूह की प्रमुख कंपनी है। समूह के मुख्य कार्यकारी राकेश मल्होत्रा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि ई-बाइक के कारोबार के लिए उनके समूह ने नई कंपनी लेक्ट्रिक्स की स्थापना की है। लेक्ट्रिक्स शुरुआत में ई-बाइक के दो मॉडल उतारने जा रही है, जो तैयार हो चुके हैं। इनमें से पहला मॉडल 250 वाट की बैटरी वाला होगा और उसे अक्टूबर में उतार दिया जाएगा।
दूसरे मॉडल की बैटरी 400 से 500 वाट की होगी और उसे मार्च 2009 तक बाजार में पेश कर दिया जाएगा। इनकी कीमत 28,000 रुपये से 29,500 रुपये के बीच रखी जाएगी। कंपनी इसके लिए चीन के शेनझेंग में स्थापित अपनी सहायक कंपनी में मोटर का निर्माण कर रही है। बाकी पुर्जे हिमाचल प्रदेश के गारगेट में उसके संयंत्र में बनाए जाएंगे और भारतीय कंपनियों से लिए जाएंगे। कंपनी के मुताबिक उसकी बाइक में बैटरी कम से कम 18 महीने तक चलेगी और नई बैटरी की कीमत तकरीबन 6,000 रुपये होगी।
मल्होत्रा ने कहा कि उनकी निगाह छोटे शहरों पर है। कंपनी को पहले साल में ही 175 से 250 करोड़ रुपये की ई-बाइक बिकने की उम्मीद है। पांच साल में उन्हें यह आंकड़ा 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
दूरसंचार में निवेश
दूरसंचार बुनियादी ढांचे की किल्लत को देखते हुए ल्युमिनस टेलीइन्फ्रा 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। मल्होत्रा ने कहा कि दूरसंचार ऑपरेटरों का बड़ा खर्च डीजल पर होता है। लेकिन ल्युमिनस टेलीइन्फ्रा के सॉल्युशंस के जरिये ऑपरेटरों के डीजल खर्च में 70 फीसद तक की कमी आ सकती है। जानकारों का मानना है कि अगले 2-3 साल में ऑपरेटर डीजल पर ही तकरीबन 12,000 करोड़ रुपये खर्च कर देंगे।
मल्होत्रा ने बताया कि उन्होंने कुछ ऑपरेटरों के साथ करार भी कर लिए हैं और परीक्षण शुरू होने वाला है। लेकिन उन्होंने फिलहाल इसका ज्यादा ब्योरा देने से इनकार कर दिया। अलबत्ता उन्होंने यह जरूर बताया कि ल्युमिनस इस प्रौद्योगिकी का पेटेंट कराकर इसे विदेश में बेचने पर भी विचार कर रही है। इसके लिए वह यूरोप के कुछ देशों और पश्चिम एशिया पर निशाना साध रहे हैं।