हिंडाल्को से लेकर वेदांत, हिंदुस्तान जिंक, नालको और हिंदुस्तान कॉपर तक लगभग सभी गैर-लौह कंपनियां भविष्य के लिए अपने पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी कर रही हैं। इन कंपनियों ने उपभोक्ता उद्योगों से लगातार बढ़ रही मांग को भुनाने के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने का निर्णय लिया है।
इन कंपनियों की ओर से हाल में की गई घोषणाओं से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023 से लेकर वित्त वर्ष 2029 के बीच करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजना है। अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक कार, बेवरिजेस कैन, इलेक्ट्रॉनिक, केबल और ड्यूरेबल उत्पाद एवं एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों से धातुओं की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पूंजीगत खर्च बढ़ाने की आवश्यकता का संबंध पिछले कुछ वर्षों के दौरान भारत में और वैश्विक स्तर पर धातु कंपनियों द्वारा क्षमता विस्तार में सुस्ती से भी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऋण बोझ के कारण धातु कंपनियों ने क्षमता विस्तार के मोर्चे पर अपनी रफ्तार धीमी कर दी थी।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी. चोकालिंगम ने कहा कि वैश्विक महामारी के बाद मांग में तेजी, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और हाल की तिमाहियों में कंपनियों के बहीखातों की बेहतर स्थिति के कारण अब मांग परिदृश्य बदल रहा है। इन सब कारकों से प्रेरित होकर कंपनियां क्षमता विस्तार के मोर्चे पर आगे बढ़ रही हैं।
जरा इस पर गौर करें: आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को ने मार्च में कहा था कि वह वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2027 के बीच अपने घरेलू एवं विदेशी परिचालन में 8 अरब डॉलर यानी करीब 62,240 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कंपनी ने अपनी अमेरिकी सहायक इकाई नोवेलिस में 4.5 से 4.8 अरब डॉलर (35,010 से 37,344 करोड़ रुपये) की पूंजी डालेगी जबकि भारतीय कारोबार में 3.4 अरब डॉलर (26,452 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। मई तक कंपनी ने इस संबंध में उल्लेखनीय निवेश करने की घोषणा की थी और उसने कहा कि कंपनी 2.5 अरब डॉलर यानी करीब 19,450 करोड़ रुपये के निवेश से अमेरिका में एक नया रीसाइक्लिंग ऐंड रोलिंग संयंत्र स्थापित करेगी। केवल नोवेलिस ने ही 3.4 अरब डॉलर यानी करीब 26,452 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
वेदांत ने भी चौथी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करते समय कहा था कि वह वित्त वर्ष 2023 में अपने पूंजीगत खर्च परिव्यय को दोगुना करते हुए 2 अरब डॉलर यानी 15,560 करोड़ रुपये करने की योजना बना रही है। वित्त वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 1 अरब डॉलर यानी करीब 7,780 करोड़ रुपये रहा था। वेदांत की सहायक इकाई हिंदुस्तान जिंक ने भी वित्त वर्ष 2023 के लिए 1,150 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का प्रावधान किया है।