चिप के लिए ताइवान पर अ​धिक निर्भरता

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:35 PM IST

 भारत का मोबाइल उपकरण विनिर्माण उद्योग अपनी चिप जरूरतों के लिए ताइवान की फाउंड्री यानी चिप विनिर्माताओं पर 75 फीसदी से अधिक निर्भर है। इंडियन सेल्युलर ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने ऐसा अनुमान जाहिर किया है। आईसीईए देश में वैश्विक एवं घरेलू मोबाइल उपकरण विनिर्माताओं का प्रतिनिधि संगठन है।
यदि हम उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर वाहन, पीसी, लैपटॉप आदि सभी उद्योगों के लिए समग्र चिप जरूरत के लिहाज से देखें तो ताइवान के आंकड़े में कुछ कमी दिख सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सभी उद्योगों की समग्र चिप जरूरत के लिहाज से ताइवान पर भारत की निर्भरता करीब 60 फीसदी होगी।
चिप के लिए ताइवान पर भारत की अत्यधिक निर्भरता इस तथ्य के अनुरूप ही है कि देश में टीएसएमसी के नेतृत्व वाली फाउंड्रीज का वैश्विक माइक्रो चिप आपूर्ति में 70 फीसदी से अधिक योगदान है। गार्टनर के एक आकलन में ऐसा कहा गया है। इसलिए चीन द्वारा ताइवान के घेराव के कारण चिप आपूर्ति बाधित होने की स्थिति का भी आकलन किया जा रहा है। 
आईसीईए के चेयरमैन पंकज महिंद्रू ने कहा, ‘भारत में मोबाइल उपकरणों के लिए चिप की आपूर्ति करने वाली तीन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में अमेरिकी कंपनी क्वालकॉम, ताइवान की कंपनी मीडियाटेक और चीन की 
कंपनी यूनिसोक शामिल हैं। ताइवान में फैब्रिकेशन 75 फीसदी से अधिक है।’
कई मोबाइल डिवाइस विनिर्माताओं का कहना है कि व्यक्तिगत स्तर पर यह आंकड़ा कहीं अधिक है। उदाहरण के लिए, एक घरेलू ईएमएस कंपनी का कहना है कि उसके लिहाज से यह आंकड़ा 90 फीसदी तक हो सकता है।
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन एवं वीएलएसआई सोसाइटी के अध्यक्ष सत्य गुप्ता ने कहा, ‘हम सभी श्रेणियों में ताइवान की कंपनियों पर कहीं अधिक निर्भर हैं और हमारा मानना है कि देश में इस्तेमाल होने वाले सभी चिप के लिए ताइवान पर निर्भरता 50 से 60 फीसदी हो सकती है। इसलिए क्वालकॉम, ब्रॉडकॉम, एएमडी, एनवीआइडिया आदि वैश्विक फैबलेस कंपनियां भारत में आपूर्ति के लिए ताइनवान में बने चिप का उपयोग करती हैं। यहां तक कि भारतीय फैबलेस स्टार्टअप भी चिप विनिर्माण के लिए टीएसएमसी और यूएमसी पर निर्भर हैं।’
हालांकि गुप्ता ने यह भी कहा कि हम यूरोप और एकीकृत उपकरण विनिर्माताओं (आईडीएम) से भी काफी चिप का आयात करते हैं। ये कंपनियां फैब से लेकर अंतिम उत्पाद तैयार करती हैं और इनमें इंटेल, इनफिनियॉन, माइक्रॉन, वेस्टर्न डिजिटल आदि शामिल हैं।
जाहिर तौर पर भारत बड़े पैमाने पर चिप का उपयोगकर्ता देश है और देश में 5जी सेवाएं शुरू होने पर चिप का उपयोग कहीं अधिक बढ़ जाएगा। इसके अलावा रोबोटिक्स, मशीन से मशीन संचार, अन्य आईओटी समाधान आदि के लिए भी चिप की आवश्यकता होगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों में भी चिप का काफी उपयोग होता है। आईईएसएमए इंडिया के अनुसार, भारत में खपत होने वाले चिप का कुल मूल्य 2021 में 27 अब डॉलर रहा और यह 16 फीसदी सीएजीआर के साथ बढ़कर 2026 तक 64 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
 

First Published : August 17, 2022 | 11:35 AM IST