PayU ने बिलडेस्क (BillDesk) के अधिग्रहण की डील को रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 4.7 अरब डॉलर के इस मर्जर को अप्लाई करने के एक साल बाद मंजूरी दी थी।
साल 2018 में वॉलमार्ट द्वारा ई-कॉमर्स प्रमुख फ्लिपकार्ट के अधिग्रहण के बाद भारतीय इंटरनेट सेवा क्षेत्र में ये दूसरी सबसे बड़ी खरीद की डील मानी जा रही थी। भारत के फिनटेक क्षेत्र में यह डील सबसे बड़ी होती।
BillDesk भुगतान करने, भुगतान स्वीकार करने और उसके कलेक्शन पर केंद्रित एक पेमेंट प्रणाली है जिसे साल 2000 में एमएन श्रीनिवासु, अजय कौशल और कार्तिक गणपाते ने स्थापित किया था।
यह भारत बिल भुगतान प्रणाली (BBPS) के माध्यम से बिलर नेटवर्क की सेवाएं देता है। बताते चलें कि PayU द्वारा बिलडेस्क को खरीदने के इस सौदे की घोषणा एक साल पहले 31 अगस्त 2021 को की गई थी। इस सौदे की घोसणा के बाद से ही भारत में कंपनी का कुल निवेश 10 अरब डॉलर हो गया।
इससे पहले भी तीन भारतीय कंपनियों का अधिगृहण कर चुकी है PayU
PayU अगर ये डील रद्द नहीं करता तो ये कंपनी का चौथा भारतीय अधिग्रहण होता। इसके पहले साल 2016 में साइट्रस पे (Citrus Pay), 2019 में विबमो (Wibmo) और 2020 में PaySense का अधिग्रहण PayU ने किया था।
बता दें कि बिलडेस्क को सरकारी लेन-देन के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) सेक्टर में लगभग एकाधिकार हासिल है, जबकि PayU इंटरनेट के माध्यम से बिल भुगतान स्वीकार करने वाली कंपनियों का पसंदीदा पेमेंट गेटवे है।
सितंबर में मिली थी हरी झंडी
सितंबर में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India, या CCI) ने इस डील को मंजूरी दी थी। 31 अगस्त 2021 को बिलडेस्क के अधिग्रहण की घोषणा PayU द्वारा की गई थी। उसके बाद से कंपनी को इस समझौते पर नियामकीय मंजूरी मिलने का इंतजार था, जो सितंबर में जाकर पूरा हुआ। अब कंपनी ने खुद इस डील से बाहर निकलने का फैसला लिया है।