दूरसंचार ऑपरेटरों के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने ‘कैप्टिव नॉन-पब्लिक नेटवर्क्स’ स्थापित करने के लिए कंपनियों को सख्त शर्तें निर्धारित करने की मांग की है। यह पहल ऐसे समय में की गई है जब कैप्टिव प्राइवेट नेटवर्क के लिए केंद्रीय कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के कुछ ही दिनों बाद की गई है। दूरसंचार कंपनियों के विरोध के बावजूद कंपनियों को दूरसंचार विभाग से सीधे तौर पर स्पेक्ट्रम हासिल करते हुए प्राइवेट नेटवर्क स्थापित करने की मंजूरी दे दी गई है।
सीओएआई की ओर से दूरसंचार विभाग के सचिव के राजारमण को 18 जून को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि दूरसंचार ऑपरेटरों के लिए आरक्षित गैर-अंतरराष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार यानी गैर-आईएमटी (5जी) बैंड में किसी भी स्पेक्ट्रम का आवंटन न किया जाए। साथ ही यह भी मांग की गई है कि केवल मशीन से मशीन (एम2एम) संचार और किसी संयंत्र परिसर के भीतर संयंत्र के स्वचालन के लिए ऐसे प्राइवेट नेटवर्क स्थापित करने के लिए सख्त नियम व शर्तें होनी चाहिए।
सीओएआई यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनका पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क्स (पीएसटीएन), इंटरनेट क्लाउड प्लेटफॉर्म, अन्य प्राइवेट नेटवर्क अथवा विभिन्न दफ्तरों एवं भवनों के लिए नेटवर्क से कोई संबंध नहीं है।
सीओएआई ने यह भी कहा है कि अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए आवंटित स्पेक्ट्रम में कंपनियों के बदले किसी तीसरे पक्ष अथवा विचौलिये को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रावेट नेटवर्क के लिए नेटवर्क की स्थापना एवं परिचालन में किसी तीसरे पक्ष अथवा बिचौलिये को शामिल किए जाने से बिना स्पेक्ट्रम लाइसेंस हासिल किए दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) के तौर पिछले दरवाजे से तीसरे पक्ष का प्रवेश सुनिश्चित होगा।
इसलिए एकीकृत लाइसेंस की तरह प्रावेट नेटवर्क मालिकों के पास भी नेटवर्क स्थापित करने के लिए सभी आवश्यक उपकरण होने चाहिए और उन्हें किसी तीसरे पक्ष से किराये अथवा पट्टे पर उपकरण हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि वे ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें भी उसी प्रक्रिया के तहत स्पेक्ट्रम का आवंटन होना चाहिए जिसके तहत दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाते हैं।
यदि ऐसा किया गया तो दूरसंचार सेवा प्रदान करने से गूगल, एमेजॉन आदि वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों जैसी प्रतिस्पर्धियों को भी दूर रखा जा सकेगा। ऐसे में कंपनियों को कुछ ही दूरसंचार कंपनियों के साथ साझेदारी करने की अनुमति होगी।
पत्र में दूरसंचार कंपनियों ने कहा है कि यूज केस का मतलब साफ है कि आम लोगों को कैप्टिव नेटवर्क का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा। उनका कहना है कि कई हितधारकों ने मांग की है कि कैप्टिव नेटवर्क का उपयोग वित्तीय समावेशन और कृषि क्षेत्र में कनेक्टिविटी के लिए यूज केस तैयार किया जा सकता है।