रियल्टी कंपनियों ने बढ़ाई अपनी परियोजनाओं की रफ्तार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 6:08 PM IST

लागत के बढ़ने और रकम की कमी से बचने के लिए रियल्टी कंपनियों ने अपनी परियोजनाओं पर और तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। कंपनियों ने परियोजनाओं में लगने वाले समय में 20 फीसदी तक की कटौती करने का फैसला किया है। 


कंपनियां जिन रिहायशी परियोजनाओं को लगभग 36महीनों में पूरा करती थी अब उन्हीं परियोजनाओं को नई तकनीक की मदद से 30 महीने में पूरा किया जा रहा है। व्यावसायिक परियोजनाएं बनाने वाली रियल्टी कंपनियां तो और भी आगे हैं। इन कंपनियों ने तो इन परियोजनाओं में लगने वाले 24 महीने के वक्त को घटाकर 17 महीने कर दिया है।

जयपुर में बन रहे महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) के लिए कंपनी ने आमतौर पर लगने वाले 12 से 15 महीने से घटाकर 9 महीने कर दिया है। कंपनी ने पिछले साल नवंबर में ही 4 स्टारी भवन का निर्माण कार्य शुरू किया था और इस भवन की दो मंजिलों का काम भी पूरा हो गया है। इसमें कंपनी की बीपीओ इकाई ने काम करना भी शुरू कर दिया है।

इससे कुछ दूरी पर ही आईटी दिग्गज इन्फोसिस का भी 5 स्टोरी भवन बना रहा है। इस भवन में 3200 लोगों की क्षमता वाला बीपीओ दफ्तर बनेगा। इसका निर्माण करने वाली कंपनी ने जुलाई में इसका निर्माण कार्य शुरू किया था और इस महीने के अंत तक इसकी दो मंजिलों का निर्माण कार्य भी पूरा हो जाएगा।

पुणे की डी एस कुलकर्णी डेवेलपर्स के उपाध्यक्ष सुमित अरोरा ने कहा, ‘ग्राहकों की तरफ से काफी ज्यादा दबाव है। आपको हर समय बेहतर देना होता है अगर हम उनकी जरूरत के मुताबिक काम नहीं करेंगे तो वह किसी और कंपनी के पास जाएंगे।’ कंपनी को मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में अपनी रिहायशी परियोजनाओं को 18 से 20 महीने में पूरा करने की उम्मीद है जबकि, इन परियोजना में 24-28 महीने लगते हैं।

मॉनसून के बावजूद मुंबई में डीएलएफ, इंडियाबुल्स, दिल्ली में पार्श्वनाथ और बंगलुरु की शोभा डेवेलपर्स की सभी परियोजनाएं चल रही हैं। बेंगलुरु की शोभा डेवेलपर्स कि प्रबंध निदेशक जे सी शर्मा ने बताया, ‘अगर हम निर्माण कार्य में लगने वाले समय को दो महीने भी कम करते हैं तो हम श्रमिकों और बाकी चीजों पर होने वाले खर्च को लगभग 20 फीसदी तक कम कर सकते हैं।’

हैदराबाद की इन्दु प्रोजेक्ट्स कंपनी रिहायशी परियोजनाओं में बीमलैस स्लैब और दीवार के लिए सेल्युलर लाइटवेट कंक्रीट ब्लॉक्स का इस्तेमाल करती है। इससे कम समय और कम लागत आती है। परियोजनाओं में हो रही जल्दी की वजह पिछले 6 महीनों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 30 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक निर्माण लागत में 20-25 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हो रही है।

First Published : August 23, 2008 | 5:17 AM IST