चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) प्रदर्शन दमदार रहने के आसार हैं। कंपनी पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि तिमाही के दौरान कंपनी के प्रदर्शन को तेल कारोबार से हुई जबरदस्त आय से बल मिलेगा। विश्लेषकों का कहना है कि तिमाही के दौरान कंपनी के खुदरा कारोबार को अनुकूल आधार का लाभ मिलेगा जबकि दूरसंचार कारोबार को नए ग्राहकों के जुड़ने और शुल्क दरों में वृद्धि से रफ्तार मिलेगी। कंपनी वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा शुक्रवार यानी 22 जुलाई को करेगी।
ब्लूमबर्ग के विश्लेषकों के सर्वेक्षण के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में कंपनी 2.25 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री पर 21,615 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज कर सकती है। ब्लूमबर्ग के सर्वेक्षण में कहा गया है कि तिमाही के दौरान कंपनी का एबिटा 38,474 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।
एक साल पहले की समान अवधि से तुलना करने पर राजस्व में 56 फीसदी की वृद्धि होगी जबकि एबिटा में करीब 40 फीसदी और कर पश्चात लाभ (शुद्ध लाभ) में 76 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है। यह ब्लूमबर्ग के अनुमानों पर आधारित है। क्रमिक आधार पर कंपनी के राजस्व में करीब 9 फीसदी की वृद्धि होगी जबकि एबिटा में करीब 23 फीसदी और शुद्ध लाभ में 33.4 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान है।
मुंबई की ब्रोकरेज फर्म केआर चोकसी के प्रबंध निदेशक देवन चोकसी ने कहा, ‘चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 20023) की अप्रैल से जून की अवधि काफी हद तक उच्च सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) से प्रभावित होगी। तिमाही के दौरान कंपनी को रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रिफाइनिंग कारोबार से जबरदस्त आय का फायदा मिला है।’
चोकसी ने कहा कि आरआईएल के लिए पहली तिमाही में जीआरएम 22 से 25 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहा था जो पिछली अवधि में औसतन 10 डॉलर प्रति बैरल जीआरएम के मुकाबले दोगुना से अधिक है। जीआरएम वह मार्जिन है जो कंपनी को प्रति बैरल कच्चे तेल को ईंधन में बदलने पर मिलता है।
पहली तिमाही के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाजार में तेल की आपूर्ति प्रभावित होने, दुनिया भर में रिफाइनरी का परिचालन बंद होने और चीन से रिफाइन उत्पादों का निर्यात बंद होने का पूरा प्रभाव देखा गया है।
ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनली ने कहा कि आरआईएल जैसी भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को इन घटनाक्रमों से फायदा हुआ है क्योंकि वे रूसी स्रोत से रियायती कच्चे तेल का उपयोग करते हुए दुनिया को रिफाइन उत्पादों की आपूर्ति करने की स्थिति में थीं।
हालांकि सरकार ने 1 जुलाई को पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क लगा दिया ताकि रिफाइनरों के मुनाफे में उछाल को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि आरआईएल के मामले में इसका प्रभाव प्रति बैरल 6 से 8 डॉलर तक सीमित रहा।
रिफाइनिंग आरआईएल के कुल राजस्व में करीब 60 फीसदी और एबिटा में करीब 50 फीसदी का योगदान करने वाले ऑयल-टु-केमिकल (ओ2सी) इकाई का हिस्सा है। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल्स और खुदरा ईंधन बिक्री भी ओ2सी कारोबार का हिस्सा हैं।
दूसरी ओर, खुदरा और दूरसंचार कारोबार का कंपनी के कुल राजस्व में करीब 34 फीसदी और एबिटा में करीब 45 फीसदी का योगदान है।
ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने आरआईएल पर अपनी तिमाही रिपोर्ट में कहा है कि पिछली तीन तिमाहियों सुदृढीकरण के बाद पहली तिमाही में रिलायंस जियो के नेतृत्व में आरआईएल के दूरसंचार कारोबार में करीब 60 लाख नए ग्राहकों के जुड़ने की संभावना है। ब्रोकरेज ने कहा है कि इस बीच खुदरा कारोबार से प्राप्त राजस्व दोगुना होने की संभावना है जिसे फैशन एवं ग्रोसरी में जबरदस्त सुधार से बल मिलेगा।
बीएसई के आंकड़ों से पता चलता है कि सालाना आधार पर आरआईएल के शेयर में 1.41 फीसदी की बढ़त हुई है जबकि अप्रैल से जून की अवधि में इसमें 2.27 फीसदी की गिरावट आई है। जुलाई में नए तेल करों के लागू होने के बाद पिछले एक महीने में यह शेयर करीब 7.5 फीसदी फिसल गया।