पेट्रोल और डीजल की रिटेल बिक्री का कारोबार बंद करने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) अपने शीर्ष कर्मचारियों को बेरोजगारी से बचाने में जुट गई है।
इस कारोबार से जुड़े तकरीबन 200 प्रबंधन कर्मचारियों को नए उपक्रमों में खपाने के लिए कंपनी ने विशेषज्ञों की सलाह लेनी शुरू कर दी है। मुकेश अंबानी की कंपनी ने इन कर्मचारियों के लिए नई नौकरियां तलाशने के काम पर विशेषज्ञों को लगा दिया है।
इन विशेषज्ञों के मुताबिक अपने जरूरत से अधिक कर्मचारियों को नई नौकरियों पर लगाने के लिए इस तरह की सेवाएं लेने वाली आरआईएल पहली भारतीय कंपनी है। उनके मुताबिक भारत में भी इस तरह की यह पहली घटना है।
भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी और निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी का तमगा पाने वाली आरआईएल ने सब्सिडी की मार से परेशान होकर इसी साल की शुरुआत में अपने 1432 पेट्रोल पंप बंद करने का फैसला किया था।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पंपों पर सब्सिडी की वजह से आरआईएल के मुकाबले सस्ती दर पर पेट्रोल और ईंधन बेचा जा रहा था। तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद भी सरकार ने सरकारी कंपनियों को सब्सिडी देना बंद नहीं किया। इससे आरआईएल और दूसरी निजी क्षेत्र की तेल कंपनियों को तगड़ा घाटा हो रहा था।
एक्जिक्यूटिव रिक्रूटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक बी आर मुरलीधरन ने बताया, ‘मझोले से शीर्ष स्तर तक कुछ अधिकारी हैं, जिन्हें आरआईएल के ही किसी दूसरे उपक्रम में नहीं लगाया जा सकता।’ इन अधिकारियों के लिए नौकरी तलाशने में आरआईएल की मदद इस संगठन के तकरीबन 30 सदस्य कर रहे हैं। इसके बदले उन्हें मोटी फीस मिल रही है। हालांकि मुरलीधरन ने फीस की राशि का खुलासा करने से इनकार कर दिया।
आरआईएल ने कहा कि पेट्रोल का रिटेल कारोबार बंद होने के बाद जितने कर्मचारी बेकार हो गए थे, उनमें से ज्यादा से ज्यादा को दूसरे कारोबारों में लगाने की कोशिश कंपनी ने की है। पेट्रोल बिक्री के कारोबार से तकरीबन 2000 अधिकारी और कर्मचारी जुड़े हुए थे। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘कर्मचारियों को सही रोजगार तलाशने में मदद के लिए कंपनी ने विशेषज्ञों की सेवाएं ली हैं।’