लगातार कम होते ईंधन भंडार और बढ़ती इनकी मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अब सभी का ध्यान सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करने पर है।
इसीलिए अब अमेरिका की क्लिंटन फाउंडेशन भी गुजरात की तेज धूप में मुनाफे की रोटियां सेकने की योजना बना रही है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार ही रहता है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना होगी। गुजरात में लगभग 5,000 मेगावाट की ‘इंटीग्रेटिड सोलर सिटी’ परियोजना के लिए फाउंडेशन गुजरात सरकार से बातचीत भी कर रही है।
इस परियोजना को गुजरात में अभी तक की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सबसे बड़ी परियोजना माना जा रहा है। इस परियोजना के तहत बिजली उत्पादन की लागत साधारण तरीके के मुकाबले लगभग 70 फीसदी कम हो जाएगी यानी इस पर महज 20,000 करोड़ रुपये का ही खर्च आएगा।
सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस परियोजना में लगने वाला कच्चे माल (शीशा और पैनल) उनके द्वारा ही बनाया जाएगा। इससे इस परियोजना की लागत काफी कम हो जाएगी। थर्मल एनर्जी की उत्पादन लागत 10-11 रुपये प्रति यूनिट आती है।
उन्होंने बताया कि क्लिंटन फाउंडेशन के पास मौजूदा तकनीक के इस्तेमाल और परियोजना के स्तर को देखते हुए सोलर सिटी में बिजली उत्पादन की अनुमानित लागत लगभग 4 रुपये प्रति यूनिट होगी। इसके लिए गुजरात सरकार ने अमेरिका के नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन बार्यन को राज्य के लिए सोलर रोडमैप बनाने की जिम्मेदारी सौंपी हैं।
उन्होंने इसके लिए कच्छ और बनासकांठा को इस मेगा परियोजना के लिए सही जगह बताया है। सूत्रों के अनुसार जई एनर्जी और माइक्रोसॉफ्ट के सहारे वाली इस संस्था के पास पहले से ही 516 अरब रुपये का कोष है। फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना कैलिफोर्निया के मोजावे रेगिस्तान में है। इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 900 मेगावाट करने की योजना बनाई जा रही है।
क्लिंटन फाउंडेशन आंध्र प्रदेश और राजस्थान में भी सौर परियोजना लगाने के लिए वहां की सरकार के साथ बातचीत कर रही है। इसके अलावा एस्सार, इंडियाबुल्स, रिलायंस एडीएजी, टाटा पावर , सूर्या चक्र और यूरो जैसी बड़ी कंपनियां भी गुजरातकी धूप का फायदा उठाने के लिए कतार में हैं।