बड़े विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के पास नगर निगमों की तर्ज पर स्वयं की स्थानीय शासन इकाइयां हो सकती हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इन कर-मुक्त औद्योगिक क्षेत्रों के अंदर स्थानीय शासन इकाइयां स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों से बातचीत कर रहा है।
इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि ये इकाइयां या तो उत्तर प्रदेश में न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (नोएडा) की तरह राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की ओर से विकसित टाउनशिपों की तर्ज पर तैयार की जा सकती हैं या फिर जमशेदपुर जैसे मॉडल की तरह, जहां एक कॉरपोरेट घराने ने नागरिक बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया है।
अधिकारी ने कहा, ‘वाणिज्य मंत्रालय इस बारे में दिशा-निर्देश तैयार करेगा, लेकिन राज्य सरकार को भी इसे अपनाना होगा।’ अधिकारियों ने यह भी बताया कि ये शासन इकाइयां केवल बड़े एसईजेड के अंदर विकसित की जाएंगी, खास कर उनमें जो मल्टी-प्रोडक्ट जोन हों और जिनका क्षेत्र कम से कम 1000 हेक्टेयर हो।
इसके अलावा बड़े क्षेत्र पर आधारित और मल्टी-प्रोडक्ट जोन्स की तुलना में कुछ छोटे एसईजेड को भी स्थानीय शासन इकाइयों के दायरे में लाया जा सकता है। खासकर इन्फोटेक क्षेत्र से जुड़े ऐसे छोटे क्षेत्रों को इन इकाइयों के दायरे में नहीं लाया जाएगा जिनका आकार 10 हेक्टेयर और 50 हेक्टेयर के बीच है।
इन इकाइयों के लिए जिन मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है, उनमें कानून-व्यवस्था, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, संपत्ति कर आदि कार्य शामिल हैं। अधिकारी ने बताया, ‘उदाहरण के लिए, यदि संपत्ति कर स्थानीय निकाय या पंचायत की ओर से एकत्रित किया जाता है तो नागरिक बुनियादी सुविधा को बनाए रखने की जिम्मेदारी उसकी होगी न कि डेवलपर की। वाणिज्य मंत्रालय ऐसे मुद्दों को निपटाने की कोशिश कर रहा है।’
ऐसे एसईजेड का कामकाज इस साल शुरू हो जाएगा। इनकी निर्माण गतिविधियां अंतिम दौर में हैं। बहु उत्पाद वाले कुछ क्षेत्र तो 50,000 से भी अधिक आबादी वाले हो सकते हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व वाली संसदीय स्थाई समिति ने यह सिफारिश की थी कि सभी एसईजेड को पंचायतों और नगर निकायों जैसी स्थानीय सरकारों के दायरे में लाया जाना चाहिए।